मैं स्मार्ट नही ?

जो चीज मारती नही, वह हमें
मजबूत बनाती है।

आज जीवन का छोटा सा परिचय “ऑसू हकीकत है, मुस्कान कृत्रिम“ आज जहॉ 99 प्रतिशत लोग ऐसे जाल मे फसे हुये है, जो तालुकात रखता है, भूख से, नौकरी से, दुश्मनो के वार से अपने आप को बचाने, रिष्तो को सीजने में, इसी के बीच मे लोग बेहतर जीवन जीन का नुक्सा भूल चुके है। आज मैं स्वंय से यह प्रश्न करता हूॅ, कि जैसा जीवन मैं चाहता था, क्या वैसा जीवन जी रहे है, तो उत्तर आता है, नही ?

नही, तो क्यों नही ? तब उत्तर की तलाश में मैं खोजी की अवस्था में आ जाता हॅू, जो स्वयं का नही अपितु कई लोगो को मार्गदर्शन कर सकेगा और आज यही मेरा जीवन का उद्देश्य भी है।

इसी प्रक्रिया में जो कमीयॉ मुझे स्वयं में प्रतीत होती थी, आज मेरी खुबसूरती और सुकुन के साथ मेरी ताकत भी है।
मसलन मैं स्मार्ट नही हूॅ, क्योंकि मैं मशीन या यंत्र नही हूॅ, वैसे भी स्मार्टएक टूल है। एक पल में व्यक्ति के बारे में कहे तो, सारे पेशन, दुनिया क्या चाहती है, कौन सा चीज आय देती है एवं व्यवसाय के कटान बिन्दू ही वास्तव में जीवन को सही दिशा देते है। स्मार्ट याने एक ही व्यक्ति में बहुत सारे गुण, जो मुझमें नही हैं।

स्मार्ट (एस.एम.ए.आर.टी.) की व्याख्या निम्नानुसार है:-
एस – स्पेसिफिक (विशिष्ट): आपका लक्ष्य स्पष्ट और सटीक होना चाहिए।
एम – मेजरेबल (मापने योग्य): आप अपनी प्रगति को कैसे मापेंगे, इसका पैमाना होना चाहिए।
ए – एचीवेबल/अटेनेबल (प्राप्त करने योग्य): लक्ष्य यथार्थवाही और आपकी क्षमता के अनुसार होना चाहिए।
आर – रिलेवेंट/रियलिस्टिक (प्रासंगिक/यथार्थवादी): यह आपके जीवन या करियर के उद्देयों से मेल खाता हो।
टी – टाईम बाउंड (समय-बद्ध): लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा होनी चाहिए।

मैं जो चीज मंे अच्छा हूॅ, वही कर रहा हूॅ, और वही काम कर रहा है जो आमदनी प्रदान कर रहा है, जो आनंद दे रहा है, जो विश्व को किसी न किसी दृष्टिकोण से लाभान्वित करती है।

कहने का लब्बो लुआब यह है कि मैं अपने पेंशन टेलेन्ट खुशी एवं कान्ट्रीबुशन के कटान बिन्दु में जी रहा हूॅ।
यह कि बचपन से ही अभाव की जिंदगी में रहा हूॅ। बहुत सारी चीजो की अपेक्षा रही है, लेकिन कभी भी समय से पूरी नही हुई। आज सोचता हूॅ यही शायद जिंदगी का वॉबी सॉबी हो, जिसके बाबी सॉबी के अनुसार कोई चीज सम्पूर्ण नही होता, कोई चीज सदा नही होता, कोई चीज समाप्त नही होता। कहने का अर्थ यह है कि अपूर्णता मे ही सम्पूर्णता छुपा हुआ है। बस अंतर है सिर्फ देखने का नजरिया।

किसी भी चीज की अभाव, जिंदगी की फिलॉसफी को परिवर्तित कर देती है। वास्तव में अधिक चीजे याने ढेर सारी भौतिक चीजे याने ऐसे चीजो का संग्रह, जो समय के साथ जिसकी औचित्य समाप्त हो जाने वाली है। टी.वी. या अन्य इलेक्ट्रानिक सामाग्रीयों का नया वर्जन आने के साथ ही पुरानी टी.वी. या इलेक्ट्रानिक गजट जो तत्कालीन समय में बहुमूल्य थी, वह अपनी मूल्य खो देती है, वह भी कचरो के शक्ल में।

बहुत लोगो से दोस्ती यारी याने बहुत सारे लोगो से मेल मिलाप याने बहुत सारे संबंध याने बहुत सारी गासिप याने बहुत सारे रिश्ते जो निभाने पडते है आप चाहे या न चाहो। जो जाने अनजाने में नही निभा पाने की स्थिति में सिर्फ और सिर्फ तनाव ही पैदा करेगे, जो शांति से हमे परे ले जाता है। स्वतंत्र विचार एवं अकेलेपन को भंग करेंगे और ऐसे चीजो में संलग्न करेगा, जो अति आवश्यक नही है, बेहतर है, न्यूनतम दोस्ती यारी हो।

वैसे भी अमेरिका के प्रसिद्ध चिंतक जिमरोन के अनुसार हम पॉच व्यक्ति के औसत होते है, जिसके साथ हमारा उठना, बैठना और व्यवहार होता है। यह चुनाव हमारी जिंदगी को एक नया आयाम दे सकता है।

बहुत सारी चीजो का अभाव, जो चीजो के कमी को दर्शाता है, स्वमेव उपलब्ध वस्तुओं की महत्ता को प्रतिपादित करता है।
कितना बेहतर है, जो आपके पास है, उसका कद्र करना है, उसका देखभाल करना, क्योंकि हमारे पास जो है, उसका कद्र करना भूल चुके है, चाहे यह वस्तु हो या मानवीय संबंध। यही मानवीय संबंध में समरसता का अभाव समस्याओं को भी जन्म देता है। इसीलिये प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक एडलर ने कहा है कि, मानवीय समस्याओं के मूल में हमारा आपसी संबंध ही जिम्मेदार है। हम किसी दिन खुश या दुःख में क्यों रहते है, खुश का मतलब यह कदापि नही है कि सब चीज ठीक चल रहा है या दुःख का मतलब यह नही कि सब चीज ठीक नही चल रहा अपितु इसका मतलब यह है कि एक संबंध जो हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है, वह अच्छा या बुरा चल रहा है, इसी सेे हम खुश या दुःख को प्राप्त करते है। वस्तुतः हमारे अच्छे आपसी संबंध हमे प्रेम करना सीखाता है।

अधिक वस्तु खासकर भौतिक वस्तु, जो खोने के डर के कारण तनाव दे जाता है। दूसरे लोग के दिल मे ईष्या पैदा करता है।
ये तमाम चीजे जो जीवन को सुगम नही, अपितु जटिल बनाता है, यह जटिलता जिंदगी में सुकुन से परे ले जाता है और अंधकार के गहरे कुंए में ढकेलता है।

जहॉ तक मेरा ताल्लुकात है, किसी चीज के पीछे भागना, वह आप से दूर ही जाता है। जैसे की एक सीमा के बाद पैसा आपको सुकुन से, शांति से दूर ही ले जाता है। शायद इसीलिये जीवन के शुरूवाती दौर से मैंने प्रयास किया कि मैं पैसे के पीछे नही भागु, अपितु लक्ष्मी की जगह सरस्वती का पूजन किया और परिणाम आज मेरे सोच के अनुरूप एवं ईदर्गिद है।

और अंत में –

तुम्हे (स्मार्ट व्यक्ति को) कोई तुम से कम समझदार, तुम से कम काबिल दूसरा व्यक्ति, तुम्हे अपने काम मे नियोजित करेगा और तुम्हारे स्मार्टनेस का व्यावसायिक फायदा अपने व्यावसाय या अन्य चीजो मे उठायेगा।
अब बताओ, कौन अधिक स्मार्ट है?
तुम या फिर ………….?