शासन बड़ा या प्रधान मुख्य वन संरक्षक?
शासन ने भेजने को कहा प्रस्ताव, PCCF ने DGP से मांग लिया अभिमत – नक्सल खात्मे के बाद बस्तर में बढ़ते शिकार और जंगलों में आग लगाने का मामला


रायपुर, ( वायरलेस न्यूज छत्तीसगढ़) 24 जून। बस्तर में नक्सल खात्मे के बाद बढ़ते शिकार एवं जंगलों में आग लगाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला रिजर्व गार्ड (DRG) को वन विभाग के साथ संयुक्त अभियान में लगाने के संबंध में शासन द्वारा जारी पत्र में दिए स्पष्ट निर्देशों के पालन न करने का नया मामला सामने आया है। इस संबंध में मुख्य सचिव को भेजे गए एक पत्र में रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने वर्तमान में पदस्थ प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह हेड ऑफ द फॉरेस्ट फोर्स के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। सिंघवी का कहना है कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर चार में से कोई एक बात प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह हेड ऑफ द फॉरेस्ट फोर्स के संबंध में अवश्य सही प्रतीत होती है—या तो वे शासन के स्पष्ट आदेशों को समझ नहीं पाते, अथवा उन्होंने उनका पालन करना आवश्यक नहीं समझते, अथवा वे स्वयं को शासन के निर्देशों से ऊपर मानते हैं, अथवा वे वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति असंवेदनशील हैं।
क्या है पूरा मामला?
पूरे मामले की जानकारी देते हुए सिंघवी ने बताया कि गत माह दंतेवाड़ा जिले के राजा बंगला क्षेत्र के घने जंगल एवं पहाड़ियों में सैकड़ों की संख्या में शिकारियों ने आग लगाकर पूरे क्षेत्र को चारों ओर से घेर लिया, ताकि आग से भयभीत होकर बाहर निकलने वाले हिरण, जंगली सूअर तथा अन्य शाकाहारी एवं मांसाहारी वन्यजीवों का पहले से लगाए गए फंदों और जालों में फंसाकर शिकार किया जा सके। स्थिति इतनी गंभीर थी कि वन विभाग की छोटी-सी टीम शिकारियों की भारी संख्या के कारण बिना कोई प्रभावी कार्रवाई किए बैरंग लौट गई।
सिंघवी ने बताया कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद बस्तर क्षेत्र में शिकार, जंगलों में आग लगाने, अवैध वृक्ष कटाई तथा लकड़ी तस्करी की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है। इसी कारण उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि दंतेवाड़ा जिले में उपलब्ध लगभग 1000 जिला रिजर्व गार्ड (DRG) जवानों को वन विभाग के साथ संयुक्त ऑपरेशन में लगाया जाए, ताकि शिकार, जंगलों में आग लगाने तथा अन्य वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
शासन ने गंभीरता से लिया सुझाव
सिंघवी के अनुसार राज्य शासन ने इस सुझाव को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए 07 मई 2026 को (1) प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह वन बल प्रमुख तथा (2) प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वे प्रस्ताव का परीक्षण कर संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्रस्ताव शासन को भेजें, ताकि गृह विभाग से अनुरोध कर डीआरजी को वन विभाग के साथ संयुक्त ऑपरेशन में लगाया जा सके।
क्या किया तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ने?
सिंघवी का आरोप है कि उस समय वर्तमान प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह हेड ऑफ द फॉरेस्ट फोर्स, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) के पद पर कार्यरत थे। राज्य शासन ने अपने स्पष्ट आदेश दिनांक 07.05.2026 द्वारा केवल इतना निर्देश दिया था कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह वन बल प्रमुख एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) संयुक्त रूप से प्रस्ताव का परीक्षण कर संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्रस्ताव शासन को भेजें, ताकि शासन स्वयं गृह विभाग से आवश्यक समन्वय स्थापित कर डीआरजी को वन विभाग के साथ संयुक्त ऑपरेशन में लगाने के संबंध में आवश्यक निर्णय ले सके। शासन ने कहीं भी पुलिस महानिदेशक से अभिमत प्राप्त करने अथवा किसी अन्य विभाग से राय लेने का कोई निर्देश नहीं दिया था।
सिंघवी के अनुसार, इसके बावजूद लगभग एक माह तक शासन के पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद 09.06.2026 को तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी), जो वर्तमान में प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह हेड ऑफ द फॉरेस्ट फोर्स हैं, ने शासन को संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्रस्ताव भेजने के स्थान पर पुलिस महानिदेशक को डीआरजी की तैनाती के संबंध में पत्र लिखकर अभिमत मांगा। सिंघवी का कहना है कि यदि शासन को पुलिस महानिदेशक का अभिमत आवश्यक लगता, तो शासन स्वयं गृह विभाग के माध्यम से वह अभिमत प्राप्त कर सकता था। इसके विपरीत, शासन के स्पष्ट निर्देशों से हटकर पुलिस महानिदेशक से अभिमत मांगने के कारण न केवल शासन के आदेशों का पालन नहीं हुआ, बल्कि पूरे मामले में अनावश्यक विलंब भी हुआ। उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर तथ्य यह है कि आज तक भी शासन को संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया गया है, की
सिंघवी का कहना है कि यदि शासन के निर्देशों का समयबद्ध पालन किया गया होता, तो अब तक डीआरजी को वन विभाग के साथ संयुक्त ऑपरेशन में लगाया जा चुका होता और बस्तर क्षेत्र में बढ़ते शिकार, जंगलों में आग लगाने, अवैध वृक्ष कटाई तथा अन्य वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता था।
वर्तमान में पदस्थ प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह हेड ऑफ द फॉरेस्ट फोर्स के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग
इन्हीं तथ्यों के आधार पर सिंघवी ने मुख्य सचिव से वर्तमान में पदस्थ प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह हेड ऑफ द फॉरेस्ट फोर्स के विरुद्ध शासन के स्पष्ट निर्देशों का पालन न करने, अनावश्यक विलंब करने तथा वन एवं वन्यजीव संरक्षण को प्रभावित करने के संबंध में अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
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