भंडारण में बिलम्ब की वजह से पूरा नही हो पाया वितरण
रायगढ (अनिल आहूजा वायरलेस न्यूज़) :- लॉक डाउन के दौरान राशन दुकानों को बन्द किये जाने के निर्णय को अव्यवहारिक बताते हुए इस पुनर्विचार करने की माँग नेता प्रतिपक्ष पूनम सोलंकी ने जिला प्रसाशन से की है l राशन दुकानों को भी बन्द के दायरे में रखा गया है l इस माह भंडारण बिलम्ब से होने की वजह से ठीक तरीके से विरतण भी नही हो पाया जिसकी वजह से रोज कमाने खाने वालों व बीपीएल परिवारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है l लॉक डाउन को देखते हुए समय रहते आबंटन बढ़ाया जाना था ताकि गरीबो को लॉक डाउन की अवधि में सुचारू रूप से अनाज मिल सके l राशन दुकानों के बन्द होने के निर्णय का सर्वाधिक बुरा असर गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों को उठाना पड़ रहा है l लॉक डाउन की वजह से रोज कमाने खाने वालों के सामने विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है l रोजगार नही होने से उनकी निर्भरता सरकार से मिलने वाली सहायता पर टिकी हुई है l ऐसी स्थिति में सरकारी सहायता पहुंचाने वाली राशन दुकानो में तालाबन्दी के निर्णय से गरीबो का मनोबल टूट रहा है l राशन दुकानों से मिलने वाले अनाज के अतिरिक्त किसी भी प्रकार की सहायता के मद्देनजर वितरित किये जाने वाली राहत सामग्री भी हर वार्ड के राशन दुकानो व वार्ड के जनप्रतिनिधियों को शामिल करके वितरित की जानी चाहिए l क्योंकि वार्ड पार्षद व राशन दुकानो के पास हर वार्डो में निवासरत गरीबो व कामकाजी लोगो के दुरुस्त आंकड़े मौजूद रहते है l पिछली बार लॉक डाउन के दौरान वितरित की जाने वाली राहत सामग्री पटवारियों द्वारा चिन्हित परिवारों को दी गई जिससे वास्तविक लोगो तक राहत सामग्री नही पहुँच पाई l नेता प्रतिपक्ष पूनम सोलंकी ने कहा कि यह गलती नही दोहराई जानी चाहिए l लॉक डाउन के लागू होते ही दिहाड़ी गरीबो व रोज कमाने खाने वालों के सामने रोजी रोटी के संकट को देखते हुए अगले माह का राशन भी तत्काल इस माह के अंत तक वितरित किये जाने की मांग की गई है l ताकि रोज कमाने खाने वालों को लॉक डाउन की वजह से खासी परेशानी का सामना न करना पड़े l बहुत से ऐसे निःशक्त जन व वृद्धजन भी है जिन्हें लॉक डाउन की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है l कोरोना से बचाने हेतु लॉक डाउन आवश्यक है लेकिन लॉक डाउन की वजह से उतपन्न होने वाली समस्याओं के निदान हेतु समय रहते विचार करना आवश्यक है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति का सामना न करना पड़े l इस सम्बंध की नेता प्रतिपक्ष पूनम सोलंकी ने सहानुभूति पूर्वक विचार करने की मांग प्रसाशन से की है
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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