वन्यजीव सुरक्षा सप्ताह आज से, औपचारिकता निभाएगा विभाग!
मुआवजा बढ़ाने की सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर अब तक अमल नहीं, हाथी-मानव संघर्ष में ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
(अमित मिश्रा संपादक वायरलेस न्यूज)

देशभर में आज 2 अक्टूबर से वन्यजीव सुरक्षा सप्ताह की शुरुआत हो रही है। एक सप्ताह तक स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं और प्रतियोगिताएं आयोजित कर लोगों को वन्यजीवों की सुरक्षा का संदेश दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ में भी वन विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों की तैयारी की गई है। हालांकि, वन्यजीवों के हमले से होने वाले जनहानि और फसल नुकसान के मुआवजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर अब तक पूरी तरह अमल नहीं होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

वन्यजीवों के हमले और फसल नुकसान की स्थिति में मुआवजा राशि निर्धारित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद प्रक्रिया में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ है। खासकर हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों को लंबे समय से मानव-वन्यजीव संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। हाथियों के कारण फसल नुकसान के साथ ही जनहानि की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
मुआवजा बढ़ाने का प्रस्ताव तीन साल से लंबित
समाचार सामग्री के अनुसार पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ कार्यालय द्वारा 29 मार्च 2023 को हाथी अथवा अन्य वन्यजीवों से फसल खराब होने पर प्रति एकड़ 20 हजार रुपए मुआवजा देने का प्रस्ताव शासन के पास भेजा गया था। राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक किसानों को वर्तमान में फसल नुकसान की स्थिति में काफी कम राशि मिलती है। इसके चलते किसानों को वास्तविक नुकसान की तुलना में सीमित मुआवजा ही मिल पाता है।
फसल की लागत बढ़ी, मुआवजा अभी भी सीमित
वन्यजीवों द्वारा फसल नुकसान किए जाने पर वर्तमान व्यवस्था में किसानों को प्रति एकड़ निर्धारित मुआवजा दिया जाता है। जबकि धान जैसी फसल तैयार करने में किसान को खाद, बीज, मजदूरी और अन्य खर्चों पर हजारों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में फसल पूरी तरह बर्बाद होने पर मिलने वाला मुआवजा वास्तविक लागत की भरपाई नहीं कर पाता।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी बदलाव का इंतजार
समाचार में उल्लेखित सुप्रीम कोर्ट के 17 नवंबर 2025 के फैसले के अनुसार वन्यजीवों के हमले में मौत होने पर 10 लाख रुपए, गंभीर चोट के लिए 2 लाख रुपए तथा मामूली चोट के इलाज के लिए 25 हजार रुपए तक मुआवजा दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। इसके बाद एनटीसीए की ओर से भी जनवरी 2026 में निर्देश जारी किए गए। इसके बावजूद राज्य में इन निर्देशों के अनुरूप मुआवजा व्यवस्था में बदलाव नहीं होने का मुद्दा सामने आया है।
जागरूकता के साथ राहत व्यवस्था पर भी जोर जरूरी
वन्यजीव सुरक्षा सप्ताह का उद्देश्य लोगों में वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। लेकिन वन्यजीव संरक्षण के साथ उन ग्रामीणों की सुरक्षा और आर्थिक क्षति की भरपाई भी महत्वपूर्ण है, जो जंगल से सटे क्षेत्रों में हाथी, जंगली सूअर और अन्य वन्यजीवों के कारण प्रभावित होते हैं। ऐसे में वन्यजीव सुरक्षा सप्ताह के दौरान जागरूकता कार्यक्रमों के साथ मुआवजा व्यवस्था को प्रभावी बनाने और लंबित प्रस्तावों पर निर्णय लेने की मांग भी जोर पकड़ सकती है।
Author Profile

- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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