अन्तर्राष्ट्रीय अपराध खेल जगत छत्तीसगढ़ धर्म-कला-संस्कृति बिलासपुर मध्य प्रदेश महाराष्ट्र राष्ट्रीय रेलवे साक्षात्कार हाईकोर्ट अन्य

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अभयनारायण राय जब अस्पताल में धमके,,तब जागा अस्पताल प्रशासन, और फिर सामने आई सचाई, जिसने उसके पति समेत वहां मौजूद सभी लोगों को हिला कर रख दिया बिलासपुर के जिला कोविड अस्पताल में यह तो लापरवाही की हद है..!

On: April 28, 2021 1:46 PM
Follow Us:

बिलासपुर के जिला कोविड अस्पताल में यह तो लापरवाही की हद है..!

24 अप्रैल को भर्ती हुई महिला, की मौत, 25 अप्रेल क़ो ही हो गई.. और डाक्टर आज 28 अप्रैल की सुबह तक, उसके पति को बताते रहे..कि उसकी पत्नी का इलाज चल रहा है

हंगामा होने पर, महिला की तलाश हुई तो, मच्यूरी में मिली उसकी लाश

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अभयनारायण राय जब अस्पताल में धमके,,तब जागा अस्पताल प्रशासन, और फिर सामने आई सचाई, जिसने उसके पति समेत वहां मौजूद सभी लोगों को हिला कर रख दिया

बिलासपुर। बिलासपुर शहर के नजदीक महमंद गांव की महेशिया बाई निषाद को, उसकी तबीयत खराब होने पर परिवार के लोगों ने बिलासपुर के जिला कोविड-19 अस्पताल में भर्ती कर दिया। यह बात है 24 अप्रैल 2021 की।। इसके बाद से उस महिला का पति कमलेश निषाद रोज सुबह-शाम घंटों अस्पताल में मौजूद रहता था। उसे अस्पताल में भर्ती उसकी पत्नी महेशिया बाई से मिलने या उसे नजर भर देखने की अनुमति तो कभी मिली नहीं। लिहाजा, महेशिया बाई का पति कमलेश निषाद, डॉक्टरों से और अस्पताल के चिकित्सा कर्मियों से पूछता फिर रहा था कि, उसकी पत्नी की हालत कैसी है..? और डॉक्टर बिना इस मामले पर गौर किए, उसे सीधा बता देते थे कि उसकी पत्नी का इलाज चल रहा है। यह पूरा खेल 24 अप्रैल को महेशिया बाई निषाद के जिला अस्पताल में भर्ती होने से लेकर आज 28 अप्रैल की सुबह तक चलता रहा।
महेशियाबाई के पति को डॉक्टरों के रवैये पर शक तो रोज होता था। लेकिन वह बेचारा डॉक्टर भगवान होते हैं यह सोच कर…उनकी बात मान कर रोज अस्पताल के बाहर बैठ अपनी पत्नी के स्वस्थ होने का इंतजार करता रहा। लेकिन एक-एक दिन बीतने के साथ ही अपनी पत्नी महेशिया बाई निषाद के अस्पताल में चल रहे इलाज और डॉक्टरों के रवैए को लेकर कमलेश निषाद को काफी शक होने लगा। तब महमद गांव का इस व्यक्ति ने, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता और सर्वज्ञांत समाजसेवी, श्री अभय नारायण राय से संपर्क किया। श्री अभय नारायण राय भी महमंद गांव के ही हैं। और वह कमलेश निषाद को तथा कमलेश निषाद उनको अच्छे से पहचानते हैं। उसकी बात सुनकर श्री अभय नारायण राय यह सोचकर अस्पताल पहुंचे कि आखिर माजरा क्या है..? अस्पताल में उनसे भी शुरूवात में टरकाऊ लहजे में बात होने लगी। इससे श्री अभय नारायण राय का माथा चकराया और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर हमलावर होते हुए साफ कहा कि आखिर महेशिया बाई है कहां..? उन्होंने अस्पताल के अधिकारियों को भी झिंझोड़ना शुरु किया। श्री राय के सक्रिय होते ही जिला अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। और जब महेशिया बाई की खूब खोज-खबर की गई। तब महेशिया बाई तो नहीं मिली..! लेकिन उसकी लाश, मर्च्युरी में होने का खुलासा हुआ। इससे श्री अभय नारायण राय और उनके साथ मौजूद मृत महेशिया निषाद का पति कमलेश निषाद और रिश्तेदार भडक गये। बहुत हो हल्ले के बाद डॉक्टरों ने श्री अभय नारायण राय को बताया कि उक्त महिला को 24 अप्रैल को भर्ती किया गया था। और एक दिन 25 अप्रैल को ही उसकी मौत हो गई थी। यह सुनते ही महमंद गांव से पहुंचे लोगों ने अस्पताल में हो हंगामा शुरू कर दिया। डॉक्टरों के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि जब महेशिया बाई निषाद की मौत भर्ती होने के 1 दिन बाद ही 25 अप्रैल को हो चुकी थी। तब, अपनी पत्नी का हाल-चाल जानने के लिए रोज डॉक्टरों से, अस्पताल कर्मियों से मिलने, पूछने वाले कमलेश निषाद को इस बात की जानकारी क्यों नहीं दी गई..? और बिना उसे बताए किसके कहने पर और किसने महेशिया बाई निषाद की लाश को एक लावारिस की तरह मर्च्यूरी में रख दिया और भूल गया।

बहरहाल, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता श्री अभय नारायण राय के अस्पताल पहुंचने से पूरे मामले की जानकारी प्रकाश में आई। अगर वे नहीं आते और अस्पताल प्रबंधन दबाव में नहीं आता। तो शायद महेशिया बाई के पति कमलेश को उसकी पत्नी की, न तो मौत की खबर मिलती और न ही उसकी लाश के बारे में कोई जानकारी मिल पाती।
आज के इस महामारी के दौर में परेशान मरीज और न
उनके परिजन, डॉक्टरों को भगवान के रूप में मान रहे हैं। लेकिन अगर उन डाक्टरों की छत्रछाया में ही इस तरह का जानलेवा और भयंकर घोटाला हो।। घोर लापरवाही हो। तब, इसके लिए दोषी व्यक्ति के क्या सलूख किया जाना चाहिए..? इसका जवाब डॉक्टरों से ही पूछा जाना चाहिए।

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

Amit Mishra

अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Facebook

Join Now

Also Read

लोक कलाओं के संरक्षण और कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में संस्कृति विभाग की अभिनव पहल

कॉलेजों में बनेंगे इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब

सैनिकों के सम्मान में स्काउट्स-गाइड्स का ‘रक्षा सूत्र अभियान’

सफलता की कहानीसरस्वती साइकिल योजना से हंसिका के लिए शिक्षा की राह हुई आसान

कलेक्टर संजय कुमार जैन और एसपी सुरेंद्र कुमार जैन ने हरी झंडी दिखाकर तिरंगा यात्रा का किया शुभारंभ

सुप्रीम कोर्ट ने कार्यरत शिक्षकों को TET परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए 31अगस्त 2028 तक का समय-सीमा निर्धारित किया है-राजेश चटर्जी सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को TET परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिया है TET परीक्षा उत्तीर्ण नहीं ! हजारों शिक्षकों की नौकरी खतरे में है ?

Leave a Comment