पहले भी पिता-पुत्र 9 लाख की धोखाधड़ी व पुत्र चाचा सहित पत्रकार की जानलेवा हमला 307 सहित कई मामले में जा चुके हैं जेल
खरसिया-प्रदेश में बीजेपी के सत्ता जाने के बाद और प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने के बाद बीजेपी के कार्यकाल में गड़बड़झाला किए छूट भैय्ये नेताओं की पोल परत दर परत खुल रही है।चाहे वो धोखाधड़ी की हो या फिर पुराने रंगदारी की या फिर सरकार को चूना लगाने वाले इनके पैंतरे की। ऐसा ही मामला खरसिया क्षेत्र के बरभौना के छूट भैय्ये नेता टिकेश डनसेना की एक और फर्जीवाड़ा कारनामा सामने आया है। जिसमें ऋण पुस्तिका में छेड़छाड़ कर कम जमीन को अधिक जमीन बताकर धान की बिक्री की गई थी जिसमें सरकार को लाखों का चूना भी लगाया गया। जिसकी शिकायत अब थाने पहुंच गई है फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। जिसमें में जल्द ही एफ आई आर दर्ज होने की संभावना है।
क्या है पूरा माजरा
दरअसल बात यह है कि कृषक टिकेश डनसेना खरीफ विपणन वर्ष 2012-13 हेतू समर्थन मूल्य में धान विक्रय के लिए पंजीयन कराया था उसके रिण पुस्तिका क्रमांक 79044 एवं ऋण पुस्तिका में दर्ज रकबा 404 अंकित था लेकिन उसके द्वारा ऋण पुस्तिका को कांटछांट कर 404 के आगे 2.लगाकर 1 एकड़ जमीन को 6 एकड़ बनाकर पंजीयन कराया गया था और उसके द्वारा रु.121500 का धान बिक्री कर शासकीय योजना का लाभ लेते हुए राशि प्राप्त कर लिया है| इस प्रकार टिकेश डनसेना के द्वारा स्पष्ट फर्जीवाडा किया गया है जिसे जांच कर उक्त अपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर क्षेत्र व समाज में बढ रहे अपराध को अंकुश लगाने के लिए छाल थाने में त्वरित कार्यवाही हेतू पहुंची शिकायत| इसके माता-पिता, रामबाई डनसेना-श्रवण डनसेना बरभौना शासकीय उचित मूल्य दूकान के हेराफेरी में SDM द्वारा जांच कराये जाने पर दोषी पाये गये हैं दबी फाईल अब खुलने लगी है जिस पर जल्द होगी कार्यवाही।
आदतन अपराधी प्रवित्ति का है आरोपी
खरसिया विकासखण्ड के ग्राम बरभौना से 420 व जानलेवा हमला 307 के साथ अन्य धाराओं सहित कई अपराधों में लिप्त टिकेश डनसेना अपने पिता श्रवण डनसेना के साथ छोटे जामपाली के गरीब आदिवासी का 9 लाख रुपये डकारने के कारण एवं सिंघनपुर में युवा पत्रकार पर जानलेवा हमला में स्वयं और अपने चाचा पिताम्बर डनसेना व अन्य के साथ जेल जा चुका है अभी जमानत पर बाहर है जिसके बाद सामने आया एक और कारनामा जिसकी शिकायत छाल थाना में हुई है ।जो अभी वर्तमान में जमानत पर जेल से बाहर है ।लेकिन पुराने करतूतों की परत,परत दर परत खुल रही है।
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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