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तात्कालीन उदयपुर राजा सिंहदेव ने कहा था मेरे महामंत्री, मंत्री होते हैं मैं कैसे मंत्री बन सकता हूं

On: September 19, 2021 12:24 PM


प्रदेश में ढाई साल ढाई साल की राजनीति में डॉक्टर नंद कुमार साय ने ली चुटकी, वायरल हुआ सोशल मीडिया में खबर राजा को कभी मंत्री बनना ही नही चाहिए- तात्कालीन उदयपुर राजा सिंहदेव ने कहा था मेरे महामंत्री, मंत्री होते हैं मैं कैसे मंत्री बन सकता हूं सरगुजा धरमजयगढ़ रियासत की गाथा
धरमजयगढ़ (वायरलेस न्यूज़)
ढाई ढाई साल के मुख्यमंत्री को लेकर कांग्रेस की खींचतान किसी से नहीं छुपा है। और कुर्सी की लड़ाई रायपुर से लेकर दिल्ली तक चल रही है।इस बीच प्रदेश भाजपा वरिष्ठ नेता नंदकुमार साय ने चुटकी लेते हुए कहा है कि राजा को कभी मंत्री बनना ही नहीं चाहिए।राजा टीएस सिंह देव के पूर्वजों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि
उदयपुर स्टेट के नाम से जाना जाने वाला आज के धरमजयगढ़ में तात्कालिक राजा चंद्रशेखर सिंह देव के कोई संतान नही थे। अपने राजवंश को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने सरगुजा महाराज से राजकुमार चंन्द्रचूण प्रसाद सिंह देव को गोद लेकर राज्याभिषेक किया। बचपन से ही होनहार राजकुमार चंन्द्रचूण प्रसाद सिंह देव ने स्वतंत्रता पूर्व आईसीएस की परीक्षा देहरादून से उत्तीर्ण की । इनका विवाह त्रिपुरा महाराज की राजकुमारी के साथ हुआ। इन्हें बेस्ट हंटर के लिए हवाई जहाज ईनाम में मिला था। बेस्ट पायलट का अवार्ड त्रिपुरा एअर फोर्स में मिला था। इसके अलावा बेस्ट फोटोग्राफर का खिताब भी इन्हे मिला था।भारत चीन युद्ध 1962 में इन्होंने अपनी सेवेन एवं टू सीटर विमान के साथ 4.83 लाख कीमत का डायमंड कफ्लिंग को रायपुर के राज कुमार कालेज में तात्कालिक प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को दान किए थे। इससे पहले भारत सरकार में चंन्द्रचूण प्रसाद सिंह देव को मंत्री मंडल में शामिल होने के लिए न्योता दिया गया था। तब उन्होंने यह कहकर ठुकरा दिया था कि राजा के पास स्वयं के महामंत्री और मंत्री होते हैं तो मैं कैसे किसी का मंत्री बन सकता हूं। यही बात सरगुजा महाराज को भी कहना था जब वे मुख्यमंत्री नही बन सके।उदयपुर के तात्कालिक राजा और कोई नहीं बल्कि महाराज टीएस सिंह देव के दादा के छोटे लड़के यानी चाचा जी थे।

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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