▪धान खरीदी पर टकराव..
धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में धान खरीदी पर टकराव की आंधी के चलते प्रदेश की राजनीति के केन्द्र में किसान आ गए हैं। भूपेश सरकार की मंशा है सीधे केन्द्र सरकार को कटघरे में खड़ा करना। वह प्रदेश के किसानों का ध्यान अपनी ओर खींचने और उनकी नजरो में शुभ चिंतक बनने के लिए यह बताने में लगे हैं कि उनकी सरकार ढाई हजार रूपये प्रति क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर खरीदना चाहती है,लेकिन केन्द्र सरकार खरीदने से मना कर रही है। प्रदेश में करीब 80 प्रतिशत आबादी कृषि से जुड़ी है। और 43 प्रतिशत कृषि भूमि में धान की फसल होती है। धान का रकबा 27 लाख 59 हजार 385 हेक्टेयर है। सन् 2018-19 80 लाख 40 हजार टन धान का उत्पादन हुआ था। 16 लाख पंजीकृत किसानों ने सोसायटी के माध्यम से अपना धान बेचा था। इस बार 19 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है।
भूपेश बघेल ने 2500 रुपये क्विंटल धान खरीदी को लेकर केन्द्र सरकार को तीन दफा पत्र लिखा। केंद्रीय मंत्री से मिलकर राशि की मांग की किन्तु केंद्र ने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने 2500 रुपये क्विंटल धान खरीदा। इस बार भी छत्तीसगढ़ की सरकार 2305 धान खरीदी केन्द्रों के माध्यम से 90 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने जा रही है। केंद्र और राज्य के बीच किसानों के समर्थन मूल्य को लेकर अक्सर राजनीति होती रही है।
इंदिरा गांधी कृषि महाविद्यालय की एम.सी की छात्रा पल्लवी तिवारी कहती हैं,‘‘प्रदेश़ के किसानों को अपनी आर्थिक दशा सुधारनी है तो उन्हें अन्य लाभकारी फसलों की तरफ भी जाना होगा। मध्यप्रदेश की तरह सोयाबीन, सूरजमुखी, कपास आदि फसलें लेनी चाहिए। लेकिन सरकार फसल चक्र परिवर्तन करने का रिस्क नहीं लेना चाहती। सरकार किसानों को खुश रखने के लिए कर्ज लेकर बोनस देती है। यानी समर्थन मूल्य से अधिक पर धान खरीद सकती है किंतु उन्हें अन्य लाभकारी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित नहीं करती।’’
भूपेश सरकार ने केन्द्र सरकार से धान खरीदी का कोटा 24 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 32 लाख मीट्रिक टन करने पत्र लिखा। लेकिन केन्द्र सरकार ने खरीदी पर ही रोक लगा दी। इस बार 90 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य है। राज्य में लगभग 38 लाख मीट्रिक टन धान की खपत है। इससे ऊपर खरीदी जाने वाली लगभग 49 लाख मीट्रिक टन धान का सरकार क्या करेगी। इसे लेकर चिंता बढ़ गई है।
@रमेश कुमार “रिपु”
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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