बिलासपुर (वायरलेस न्यूज़) शीतकालीन सत्र के प्रथम दिवस में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में राज्य सरकार की घोर उपेक्षा के कारण छत्तीसगढ़ के लाखों गरीबों के वंचित होने का मामला सांसद अरुण साव ने लोकसभा में उठाया।
संसद का शीतकालीन सत्र 29 नवम्बर से प्रारंभ हुआ, और प्रथम दिवस ही सांसद अरुण साव ने प्रधानमंत्री आवास योजना का मुद्दा लोकसभा में नियम 377 के तहत लोक महत्व के मुद्दे के रूप में उठाया। उन्होंने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए एक अति महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना प्रारंभ की है। 2019 के बाद राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद गरीबों के साथ अन्याय करते हुए गरीबों को मकान से वंचित करने का घोर पाप किया जा रहा है। केन्द्र सरकार के बार-बार आग्रह और निर्देश के बाद भी राज्य सरकार घोर उपेक्षा करते हुए न तो नए आवास का पंजीयन और स्वीकृति कर रही है, न ही पुराने स्वीकृत आवासों को पूरा कर रही है, और न ही राज्यांश उपलब्ध करा रही है। इस प्रकार राज्य सरकार की घोर उपेक्षा से छत्तीसगढ़ के लाखों गरीब परिवार, प्रधानमंत्री आवास जैसे अति महत्वाकांक्षी योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं। यहां उल्लेख करना आवश्यक है, कि छत्तीसगढ़ राज्य में 2016-17 में 2,26,363, 2017-18 में 200900, 2018-19 में 3,25,212, 2019-20 में मात्र 69,365, 2020-21 में मात्र 02 एवं 2021-22 में 0 (शून्य) प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) बने हैं। सांसद साव ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि गरीबों के साथ अन्याय बंद कर उन्हें प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराये। उन्होंने केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के समुचित कियान्वयन हेतु राज्य सरकार को निर्देशित करे, ताकि राज्य की गरीब जनता को उनका हक मिल सके।
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