जगदलपुर 12 मार्च 2021
वायरलेस न्यूज अरुण पाढ़ी /
बस्तर में स्व. बलीराम कश्यप मेडिकल काॅलेज सह अस्पताल का नाम बदलने के काॅग्रेस सरकार के फैसले को लेकर भाजपा ने प्रदेश सरकार को घेरना प्रारंभ कर दिया है। संबंधित मामलें पर भाजपा नेता एवं क्षेत्र के पूर्व विधायक संतोष बाफना ने अपना कड़ा रूख अख्तियार करते हुए बयान जारी करके अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है।
पूर्व विधायक बाफना ने कहा है कि, बस्तर के जनमानस की सेवा में अपना पूरा जीवन खपा देने वाले स्व. दादा बलीराम कश्यप जी के इतिहास को मिटाने एवं उन्हें अपमानित करने के लिए ही काॅग्रेसी सरकार के द्वारा इस प्रकार का निंदनीय फैसला लिया गया है।ढाई वर्ष के कार्यकाल में इस सरकार के पास अपने किये गए कार्यों पर गर्व करने लायक कोई उपलब्धि ही नहीं है इसलिए अपनी घटिया एवं ओछी मानसिकता का परिचय दिया है इस कांग्रेस सरकार ने।
मेडिकल काॅलेज सह अस्पताल का नाम परिवर्तन करने का आदेश बहुत ही शर्मनाक है। रही बात महेन्द्र कर्मा जी की, वे स्वयं दादा बलीराम कश्यप जी के कार्यों के मुरीद थे। ऐसा नहीं है कि, भाजपा स्व. महेन्द्र कर्मा जी के नाम का विरोध कर रही है। भाजपा जितना सम्मान स्व. दादा बलीराम कश्यप जी का करती है उतना ही सम्मान भाजपा के लिए स्व. महेन्द्र कर्मा जी का भी है। क्योंकि स्व. महेंद्र कर्मा जी भी बस्तर के जनमानस की आवाज विधानसभा हो या लोकसभा में पूरी दमदारी के साथ उठाते रहे हैं लेकिन आज इस विकास विरोधी काॅग्रेस सरकार के फैसले एवं बस्तर के तथाकथित काॅग्रेसी नेता जिन्होंने नाम परिवर्तन करने की सिफारिश की है आज ऐसे इनके जनप्रतिनिधियों की घटिया सोच से खुद स्व. कर्मा जी को भी निश्चित ही शर्मिदंगी महसूस हो रही होगी।
भाजपा स्व. महेन्द्र कर्मा जी के खिलाफ बिल्कुल भी नहीं है लेकिन मेडिकल काॅलेज का नाम परिवर्तन करने से यह कतई न समझे की इस मामलें में भाजपा और उसके समस्त कार्यकर्ता मूक दर्शक बने रहेंगे। जितनी जल्दी हो सके प्रदेश सरकार इस बात को समझ लें, भाजपा स्व. दादा बलीराम कश्यप जी का अनादर बर्दाश्त नहीं करेगी। सड़क से लेकर सदन तक यदि लड़ाई भी लड़नी पड़ी तो इसके लिए भाजपा पीछे नहीं हटेगी।
यदि सरकार को स्व. महेन्द्र कर्मा जी की स्मृति को बनाए रखने के लिए कुछ करना ही है तो सरकार को अपने बजट से बस्तर में एक नए अस्पताल की स्थापना कर उसका नामकरण स्व. महेन्द्र कर्मा जी या फिर अपने अन्य नेताओं के नाम पर करके उन्हें श्रद्धांजली दे सकते है।
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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