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ये कैसा बेतुका निर्णय 20 साल कैद के बाद बूढ़े अंधे छोटू वन भैंसा को जंगल में छोड़ने की तैयारी, क्या वह जंगल में विचरण कर पाएगा?

On: April 3, 2026 11:57 AM

20 साल कैद के बाद बूढ़े अंधे छोटू वन भैंसा को जंगल में छोड़ने की तैयारी, क्या वह जंगल में विचरण कर पाएगा?

रायपुर, ( वायरलेस न्यूज 3 अप्रैल ) 20 साल कैद में रखने के बाद अब वन विभाग ने निर्णय लिया है कि उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में बाड़े में रखे बूढ़े और अंधे छोटू वन भैंसा को असम की तीन मादा वन भैंसों के साथ जंगल में रेडियो कॉलर लगाकर छोड़ेंगे। इस बाबत 12 जनवरी 2026 को अधिकारियों की बैठक के पश्चात इसका प्रस्ताव मुख्यालय पहुंच गया है।

क्या है मोड ऑफ ऑपरेशन?

छत्तीसगढ़ वन विभाग के पांच अधिकारियों और एक एनजीओ (फील्ड डायरेक्टर उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व, डीएफओ बलौदा बाजार, डिप्टी डायरेक्टर उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व, जंगल सफारी के डॉक्टर, कानन पेंडारी के डॉक्टर और एक एनजीओ) की कमेटी ने मुख्यालय को मोड ऑफ ऑपरेशन प्रेषित कर बताया है कि असम से लाई गई वन भैंसें, जो बारनवापारा अभ्यारण में रखी गई हैं, उन्हें उदंती अभ्यारण में लाया जाएगा। 45 दिन बाड़े में रखने के बाद छोटू के साथ जंगल में रेडियो कॉलर लगाकर सॉफ्ट रिलीज किया जाएगा। उद्देश्य छोटू से मादा वन भैंसों का प्रजनन कराकर संख्या बढ़ाना है।

क्या है छोटू का इतिहास?

अनुसूची-एक के संरक्षित वन भैंसा छोटू का जन्म वर्ष 2002 में हुआ था। 4 साल वह स्वच्छंद जंगल में विचरण करता रहा। इसके बाद 2006 में वन विभाग ने बिना किसी आधिकारिक आदेश के उसे बाड़े में कैद करके रख दिया। तब से कुछ साल पहले तक छोटू से कई बच्चे पैदा हुए, जिन्हें हाल ही में वन विभाग ने हाइब्रिड या क्रॉसब्रीड कहकर उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व से बाहर कर दिया है। 12 जनवरी 2026 की बैठक में भी इस बात का उल्लेख है कि हाइब्रिड वन भैंसों को उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व से बाहर रिलोकेट कर दिया गया है। छोटू 25 साल का हो गया है और उम्र के अंतिम पड़ाव में है। जानकारों को शंका है कि बढ़ी उम्र के कारण उससे प्रजनन संभव नहीं हो सकेगा। 2023 की वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट में दर्ज है कि छोटू के केयरटेकर ने बताया कि कुछ साल पहले मैटिंग का प्रयत्न करवाया गया था परन्तु मैटिंग असफल रही।

क्या छोटू अब जंगल में स्वच्छंद विचरण कर पाएगा?

6 अगस्त 2025 को वन भैंसा की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में यह उल्लेखित है कि छोटू वन भैंसा अंधा है। वन विभाग उसे आहार भी देता है वह बाड़े में रहने का आदी हो गया है। ऐसे में अब अगर उसे स्वच्छंद विचरण के लिए जंगल में छोड़ दिया जाएगा, तो क्या वह स्वच्छंद विचरण करेगा या मर जाएगा? जानकारों के अनुसार, अगर छोटू को बाड़े से बाहर छोड़ भी दिया जाए, तो वह अंधा होने के कारण जंगल में नहीं जा पाएगा और आहार के लिए बाड़े के आसपास ही घूमता रहेगा।

क्या होगा मादा वन भैंसों का?

जैसा कि विषय विशेषज्ञों द्वारा संभावना व्यक्त की जा रही है, छोटू बाड़े के आसपास ही रहेगा, परंतु बारनवापारा से लाई जाने वाली मादा वन भैंसें जंगल में विचरण करते हुए दूर चली जाएंगी। तब छोटू से प्रजनन असंभव हो जाएगा और पालतू भैंसों से प्रजनन की संभावना बनी रहेगी। उदंती सीतानदी में कुछ-कुछ अंतराल में बाघ का आना-जाना लगा रहता है, वन भैंसा बड़े झुंड में रहता है, जिससे संकट के समय वे एक-दूसरे की रक्षा करते हैं। परंतु तीन मादा वन भैंसों, जिसमें से शावक है, के छोटे झुण्ड का जीवन खतरे में रहेगा।

उदंती अभ्यारण बना राजकीय पशु वन भैसों की प्रयोगशाला?

जानकारी देते हुए रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने बताया कि वन विभाग 20 साल से नए-नए प्रयोग कर रहा है। 2006 में भैंस बाड़ा बनाया, उसमें छोटू को पकड़ कर रख दिया। फिर आशा नामक हाइब्रिड वन भैंसा को ग्रामीण से जबरदस्ती करके लाया गया, उससे कई बच्चे पैदा करवाए।

2014 में दीप आशा को क्लोनिंग कराकर पैदा कराया, जो मुर्रा भैंसा निकल गई। वर्षों से वह रायपुर के जंगल सफारी जू में कैद है। 2018 में रम्भा और मेनका हाइब्रिड वन भैंसा को खरीद कर लाया गया, उनसे भी कई हाइब्रिड बच्चे पैदा करवाए, जिन पर करोड़ों खर्च किए, और सभी को कई साल कैद रखा। बाद में सभी को उदंती सीतानदी में विचरण करने के लिए छोड़ दिया और अब टाइगर रिजर्व के बाहर इतनी दूर रिलोकेट कर दिया कि वे वापस नहीं आ पाए। छोटू का वीर्य निकालने के लिए एक लाख का शूट भी लगवाया, वह भी फेल रहा। सिंघवी ने पूछा, क्या यह वन भैंसा प्रयोगशाला नहीं है?

अधिकारी सो रहे थे क्या?

छोटू का ज्यादा उम्र का होने के कारण उससे प्रजनन की संभावना भी अत्यंत कम रहेगी। सिंघवी ने वन विभाग से पूछा कि तब क्या करेंगे, जब छोटू से प्रजनन नहीं हो पाएगा? सिंघवी ने आरोप लगाया कि असम से एक मादा 2020 में और चार मादा 2023 में लाई गईं, तब उन्हें छोटू के पास क्यों नहीं लाया गया? छ: साल से क्या अधिकारी सो रहे थे?

2030 तक हर साल लायेंगे दस वन भैंसे असम से, परन्तु क्या बारनवापारा के बचे वन भैंसे कैद में ही रहेंगे?

सिंघवी ने बताया कि प्रस्ताव में उल्लेख है कि 2026 से 2030 तक हर साल आठ मादा और दो नर वन भैंसा असम से लाकर उन्हें 45 दिन बाड़े में रखकर उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व में छोड़ दिया जाएगा। सिंघवी ने बताया कि प्रस्ताव में इस बात का जिक्र ही नहीं है कि पहले असम से लाए गए बारनवापारा में बाड़े में वर्षों से कैद, बचे हुए चार वन भैंसा और उनके बच्चों का क्या होगा? और अगर उन्हें भी उदंती सीतानदी में लाकर छोड़ा जाना है, तो उसका जिक्र प्रस्ताव में क्यों नहीं है?
नितिन सिंघवी
9826126200

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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