रायपुर (वायरलेस न्यूज) अब रायपुर के मालों में पार्किंग वाले अवैध वसूली नहीं कर पाएंगे! किसी भी दो चार पहिया को नहीं रोका जाएगा यदि रोका गया तो उस पर कार्यवाही भी हो सकती है। ये काम रायपुर के युवा उच्च न्यायालय अधिवक्ता श्री अंजिनेश शुक्ला ने जनहित याचिका जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग अतिरिक्त पीठ में अंबुजा सिटी मॉल टू और फोर वीलर से कैंपस में पार्किंग के द्वारा अवैध वसूली की जा रही थी उस पर अधिवक्ता अंजिनेश की जनहित में बड़ी जीत हुई है।

रायपुर(छ.ग) न्यायालय ने अंबुजा सिटी सेंटर मॉल को वाहनो से पार्किंग शुल्क वसूली को अवैध घोषित करते हुए निशुल्क पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश पारित किया है।

रायपुर दिनांक 22 अप्रैल 2026 — उच्च न्यायालय अधिवक्ता श्री अंजिनेश अंजय शुक्ला द्वारा प्रस्तुत परिवाद पर सुनवाई करते हुए
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, अतिरिक्त पीठ
रायपुर की अदालत ने प्रकरण क्रमांक DC/387/CC/2025/198 में अंबुजा सिटी सेंटर मॉल को किसी भी वाहन टू व्हीलर या फोर व्हीलर से आने वाले उपभोक्ताओं से कोई पार्किंग शुल्क वसूली नहीं की जायेगी उक्त प्रकरण को अधिवक्ता अंजिनेश अंजय शुक्ला स्वयं ने पैरवी की हैँ ।

दिनांक 15.06.2025 को परिवादी अपनी फोर व्हीलर वाहन क्रमांक CG 10 BM 9901 से अंबुजा मॉल गया था जहाँ उससे 30 रूपए पार्किंग शुल्क लिये गए | परिवादी ने विरोध किया की उसे पार्किंग स्थल का उपयोग नहीं करना है केवल अपनी माता जी को छोड़ कर निकल जाना है परन्तु मॉल प्रबंधन ने जानकारी दी की अंबुजा मॉल में फ्री पिक अप ड्राप जैसी कोई सुविधा नहीं है । इस कथन से आहत होकर अधिवक्ता शुक्ला ने न्यायालय में अंबुजा मॉल के विरुद्ध पार्किंग शुल्क वसूली को अवैध घोषित करने की मांग करते हुए एक परिवाद प्रस्तुत किया था।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता शुक्ला ने माननीय गुजरात उच्च न्यायालय तथा विभिन्न उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के प्रासंगिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए न्यायालय के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया कि मॉल के द्वारा वसूली जा रही पार्किंग शुल्क राशि अवैध है एवं मानसिक क्षति के रूप में ₹50,000 की मांग भी परिवादी ने की है |
न्यायालय ने प्रस्तुत तर्कों और विधिक दृष्टांतों का संज्ञान लेते हुए उन्हें विधिसम्मत माना और मॉल को वाहनो से पार्किंग शुल्क वसूली को अवैध घोषित करते हुए निशुल्क पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने को निर्देशित किया है।
यह निर्णय आम जनमानस को राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।

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Amit Mishra - Editor in Chief
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