*सर्पदंश राहत प्रकरणों में निर्दोष अधिकारियों के संरक्षण की मांग*
*प्रशासनिक सेवा संघ ने मुख्यमंत्री के नाम संभागायुक्त को सौंपा ज्ञापन*
बिलासपुर, (वायरलेस न्यूज 25 जुलाई 2026)
छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा संघ की जिला इकाई बिलासपुर ने संभागायुक्त श्री सुनील जैन से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। अपर कलेक्टर श्री शिवकुमार बनर्जी के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में प्राकृतिक आपदा राहत, विशेषकर सर्पदंश जनित मृत्यु के आर्थिक सहायता प्रकरणों में राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को अनावश्यक रूप से आपराधिक जांच में शामिल किए जाने पर चिंता व्यक्त की गई।
संघ ने कहा कि यदि किसी प्रकरण में मिथ्या शपथपत्र, जाली हस्ताक्षर, फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कूटरचित दस्तावेज अथवा अन्य असत्य अभिलेखों के आधार पर न्यायालय से आदेश प्राप्त किए गए हैं, तो कार्रवाई का केंद्र वास्तविक दोषी व्यक्ति हों, न कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर वैधानिक आदेश पारित करने वाले राजस्व न्यायालय के अधिकारी। ज्ञापन में कहा गया कि प्राकृतिक आपदा राहत प्रकरणों में राजस्व न्यायालय पुलिस, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जारी प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेते हैं। ऐसे में यदि बाद में दस्तावेज फर्जी या कूटरचित पाए जाते हैं तो उनकी जवाबदेही दस्तावेज तैयार करने, प्रमाणित करने अथवा प्रस्तुत करने वाले व्यक्तियों की होनी चाहिए।
संघ ने मांग की कि सर्पदंश राहत प्रकरणों में न्यायालय के समक्ष फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर न्यायालय को गुमराह करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 227 से 231 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत प्रभावी विवेचना एवं अभियोजन सुनिश्चित किया जाए तथा ऐसे मामलों को केवल सामान्य धोखाधड़ी नहीं, बल्कि “Fraud upon the Court” (न्यायालय से छल) के रूप में देखा जाए।ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि न्यायाधीश (संरक्षण) अधिनियम, 1985 के प्रावधानों एवं राज्य शासन के 14 अक्टूबर 2024 के दिशानिर्देशों का भी अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए जिसमें राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को विधिक संरक्षण प्राप्त है। बिना प्रत्यक्ष एवं ठोस साक्ष्य के केवल न्यायिक आदेश पारित करने के आधार पर उनके विरुद्ध आपराधिक उत्तरदायित्व निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए।
संघ ने राज्य शासन से मांग की कि सभी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं कि प्राकृतिक आपदा राहत प्रकरणों की विवेचना के दौरान राजस्व न्यायालयों की न्यायिक स्वतंत्रता एवं विधिक संरक्षण का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसे मामलों की जांच के लिए पुलिस, स्वास्थ्य एवं राजस्व विभाग के बीच समन्वित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर लागू किया जाए, ताकि राहत योजनाओं के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री शिवकुमार बनर्जी, अपर कलेक्टर डॉ.ज्योति पटेल, एसडीएम श्री मनीष साहू, श्री प्रवेश पैकरा, शिवकुमार कंवर,श्री नितिन तिवारी, डिप्टी कलेक्टर श्री गबेल सहित प्रशासनिक सेवा संघ के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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