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शबरी के राम’ की विशेष स्क्रीनिंग – श्रद्धा, सेवा और समर्पण की कथा ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध,शिवरीनारायण की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है फिल्म ‘शबरी के राम’,शबरी के राम के निर्माता निर्देशक डॉ शाहिद अली

On: November 7, 2026 9:14 AM


शबरी के स्मरण से हमारा परिष्कार होता है – डॉ सच्चिदानंद जोशी


– ‘शबरी के राम’ की विशेष स्क्रीनिंग – श्रद्धा, सेवा और समर्पण की कथा ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

*डॉ शाहिद अली*


– शिवरीनारायण की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है फिल्म ‘शबरी के राम’


नई दिल्ली। (अमित मिश्रा संपादक वायरलेस न्यूज)
भारतीय विरासत संस्थान (आईआईएच) में छत्तीसगढ़ की धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी शिवरीनारायण पर आधारित वृत्तचित्र ‘शबरी के राम’ की विशेष स्क्रीनिंग की गई। कार्यक्रम में आईआईएच के कुलपति और इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत पाठक और उपाध्यक्ष (पश्चिम) एस.पी. सिंह के साथ फ़िल्म के निर्माता-निर्देशक डॉ. शाहिद अली और डी.ओ.पी., शोध एवं सह-संपादक चन्द्रशेखर कश्यप की भी उपस्थित रही।

शबरी के राम की स्क्रीनिंग


भारतीय विरासत संस्थान (आईआईएच) के कुलपति और इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि कैसे हम छत्तीसगढ़ के इस वैभव को प्रदेश के बाहर देश में और देश के बाहर लोगों तक पहुंचा सकते हैं। इसी को ध्यान में रखकर फिल्म के निर्माता-निर्देशक डॉ. शाहिद अली ‘‘शबरी के राम’’ फिल्म की परिकल्पना की है। शबरी का प्रसंग हम सबके लिए इसलिए प्रेरणादायी है, क्योंकि शबरी को भगवान श्रीराम ने नवधा भक्ति की प्रेरणा दी थी। और, वो जो नवधा भक्ति की प्रेरणा थी, वो हम सबके जीवन में कहीं न कहीं लागू होती है। अगर हम उस नवधा भक्ति के नौ सूत्रों को अपने सामने रखें तो हमें लगता है कि उससे हमारा जीवन कैसे और अधिक परिष्कृत, और अधिक सुविचारित हो जाएगा।
उन्होंने कहा, हम सब अपनी तरह से अपने आराध्य को पूजते हैं, उनके प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं, लेकिन जैसा भगवान श्रीराम ने शबरी को नवधा भक्ति का साक्षात्कार दिया है, वो अपने आप में अद्भुत है। शबरी का जहां भी हम स्मरण करते हैं तो एक तरह से हम अपने अंदर परिष्कार पाते हैं। अपने आपको और अधिक उन्नत यानि और अधिक एलिवेटिड पाते हैं। इतना महान चरित्र शबरी का है और उस शबरी की भूमि को हमारे सामने प्रस्तुत करने का प्रकल्प है फिल्म ‘शबरी के राम’। यह फिल्म भाव की भाषा कहती है। स्क्रीनिंग में उपस्थित अन्य अतिथियों ने फिल्म को आस्था और विरासत के बीच सेतु बताते हुए इसकी टीम को बधाई दी।
‘शबरी के राम’ भगवान राम के प्रति शबरी की अटूट भक्ति, प्रेम और समर्पण की कथा है। लोकमान्यता है कि भगवान राम का आगमन इस पवित्र भूमि पर हुआ था। इसी आस्था के कारण शिवरीनारायण एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल के रूप में प्रतिष्ठित है। इस फिल्म के माध्यम से छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चंपा जिले में महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के संगम पर स्थित शिवरीनारायण मंदिर की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को सामने लाती है। फ़िल्म में महानदी, शिवनाथ और हसदेव नदियों के संगम से जुड़ी मान्यताओं, शिवरीनारायण की स्थापत्य परंपरा, लोकविश्वास, वार्षिक मेले और स्थानीय जनजीवन को प्रस्तुत किया गया है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर में स्थापित भगवान जगन्नाथ की मूल प्रतिमा इसी स्थान से गई थी।
माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक आयोजित होने वाला वार्षिक मेला आज भी क्षेत्र के सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का प्रमुख केन्द्र है। वृत्तचित्र का उद्देश्य शिवरीनारायण की श्रद्धा, सेवा, परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और जनजीवन को दस्तावेज़ी रूप में संरक्षित करते हुए व्यापक दर्शक-समूह तक पहुंचाना है।
स्क्रीनिंग कार्यक्रम के दौरान फिल्म की यूनिट से जुड़े लोगों का सम्मान भी किया गया। साथ ही, डॉ. शाहिद अली ने मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद किया तथा फ़िल्म की विषयवस्तु, शोध, निर्माण-प्रक्रिया और उसके सांस्कृतिक पक्षों पर चर्चा की। स्क्रीनिंग के बाद चन्द्रशेखर कश्यप ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट किया।

शबरी के राम के निर्माता निर्देशक डॉ शाहिद अली

फिल्म के प्रोड्यूसर एवं डायरेक्टर डॉ शाहिद अली कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में प्राध्यापक हैं। मीडिया के क्षेत्र में लेखन, शोध एवं अध्यापन के क्षेत्र में लोकप्रिय डॉ शाहिद अली की फिल्म कला का यह अनूठा प्रयोग राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। भारत सरकार के लोकप्रिय संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज, नोएडा के अलावा दिल्ली में आंध्रा भवन में शबरी के राम डाक्यूमेंट्री फिल्म का प्रीमियर हुआ जिसमें राजधानी दिल्ली के प्रख्यात कला संस्कृति के सुधिजनों की मौजूदगी रही। छत्तीसगढ़ में कला एवं संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान देने के लिए डॉ शाहिद अली की निरंतर सक्रियता से काफी उम्मीदें जगीं हैं इससे छत्तीसगढ़ के फिल्म कला को भी लाभ होगा।

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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