अचानकमार टाइगर रिजर्व में पांच बाघिन के दर्जनभर शावक टेरेटरी की तलाश में बफर जोन में चहलकदमी कर रहे हैं

बाघों की सुरक्षा के लिए करना होगा इंतजाम
फोटो – फाइल से लिया गया है
बिलासपुर (अमित मिश्रा संपादक वायरलेस न्यूज) अचानकमार टाइगर रिजर्व में एक बार फिर अपने पुराने वैभव में लौटने लगा है , एटीआर में वयस्क बाघों की संख्या डबल फिगर (सुरक्षा कारणों से संख्या नहीं बता सकते) में पहुंच गई है ।
वयस्क बाघों में से पांच बाघिन के एक दर्जन से ज्यादा शावक होने की सूत्रों ने जानकारी दी है।
बाघों की बढ़ती आबादी को देखते हुए अचानकमार टाइगर रिजर्व की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि वर्तमान में पदस्थ मुख्य वनसंरक्षक (वन्य प्राणी) एवं फील्ड डायरेक्टर प्रियंका पाण्डेय के आने से वन क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूती मिल रहा है। जबकि पूर्व में रहे डिप्टी डायरेक्टर गणेश की उपस्थिति में बाघों के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता रहा है इनके कार्यकाल में बाघों के दो शिकार भी हुए हैं और साथ ही सारंगढ़ के पास गोमर्दा के जंगलों भी बाघ की शिकार को दबाया गया था, इनका मैनेजमेंट सही नहीं रहा है,इसीलिए अभी अचानकमार टाइगर रिजर्व से हटा बायोस्फीयर में लूप लाइन में बैठाया गया है।
वर्ष 2023 में अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या महज 5 ही थी, प्रे – बेस की व्यवस्था करने तथा सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने की वजह से बाघों की संख्या महज़ तीन साल में आकर्षक अंक को छू लिया है, (सुरक्षा कारणों से संख्या नहीं बता सकते) के करीब पहुंच गई है। शावक डेढ़ से दो वर्ष में अपनी मां से अलग हो शिकार करने लगते हैं , इसी के साथ ही मां से अलग हुए शावक अपना कुनबा खुद बढ़ाने में लग जाते हैं।
मां से अलग हुए हुए बाघिन ने दिए शावकों को जन्म कुछ दिन पहले ही एटीआर के प्रतिबंधित क्षेत्र में बाघिन के हमले से बाघिन के हमले से धरमजीत घृतलहरें की मौत हो गई थी , वन सूत्रों ने बताया है कि ये वहीं बाघिन है जो दो वर्ष पूर्व मनेंद्रगढ़ से रेस्क्यू कर लाई गई थी उसी बाघिन के शावक ही वयस्क हो गई है उसी ने अपने शावकों की रक्षा करने के लिए धर्मजीत पर हमला किया था , बाघिन के हमले से युवक के मारे जाने की जानकारी मिलने के बाद बढ़ी संख्या में ग्रामीण पहुंच गए थे लेकिन एक प्रत्यक्ष दर्शी ग्रामीण ने बताया कि बाघिन अपने शावकों की रक्षा करने के लिए वही पर डटी रही थी।
मादा बाघ अपने सुरक्षा के लिए जगह बदलते रहते हैं
मादा बाघ अपने शावकों की सुरक्षा के लिए हर समय चौकन्नी रहती हैं , इसलिए बिग कैट प्रजाति के वन्यजीव अपने शावक की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपनी टेरेटरी बदलते रहते हैं , यही कारण है कि एटीआर के बाघ कोर एरिया से निकलकर बफर जोन में प्रवेश कर जाते हैं , वहीं बफर जोन में प्रायः पालतू मवेशियों के शिकार करने की घटनाएं सुनाई देती रहती है।
गश्त बढ़ाने की जरूरत
अचानकमार टाइगर रिजर्व 914 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है इनमें से सवा 6 सो किलोमीटर का क्षेत्रफल ही कोर एरिया में आता है जहां सामान्य आदमियों को जाना प्रतिबंधित है,228 वर्ग किलोमीटर बफर जोन में शामिल है और इसी बफर जोन में 17 गांव भी शामिल है पूर्व में डीएफओ रहे श्री एस डी बड़गैय्यां के कार्यकाल में पांच गांवों शानदार विस्थापन किया गया था, और अभी एटीआर से निकाल कर दूसरे जगह भी शिप्ट किया जाना प्रस्तावित है लेकिन शिफ्टिंग की प्रक्रिया बहुत धीमीगति है , इसी के साथ ही वन क्षेत्र में फील्ड स्टाफ की संख्या बढ़ाने और बाघों की सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ाने की जरूरत है।
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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