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वृक्ष हैं मानव जीवन के आधार- डॉ विनय कुमार पाठक, वृक्षों को राखी बांधकर लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

On: August 27, 2026 1:26 PM


वृक्ष हैं मानव जीवन के आधार- डॉ विनय कुमार पाठक
वृक्षों को राखी बांधकर लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
वृक्ष रक्षाबंधन महोत्सव का 26वाँ आयोजन संपन्न


बिलासपुर। ( वायरलेस न्यूज) रक्षाबंधन के पावन पर्व पर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन -जागरूकता का संदेश देने के उद्देश्य से पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति, बिलासपुर द्वारा आयोजित वृक्ष रक्षाबंधन महोत्सव का 26वाँ आयोजन स्थानीय विवेकानंद उद्यान में उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। विगत 25 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा यह अनूठा आयोजन अब शहर की पर्यावरणीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है।
यह आयोजन डॉ विनय कुमार पाठक कुलपति थावे विद्यापीठ के मुख्य आतिथ्य, देवाशीष घोष लाल्टू एल्डरमेन नगर पालिक निगम बिलासपुर की अध्यक्षता एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रमेशचन्द्र श्रीवास्तव, डॉ विष्णु कुमार तिवारी, कवि बुधराम यादव, डॉ अर्चना मिश्रा एवं रंगकर्मी महेश श्रीवास की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
समारोह के प्रारंभ में उपस्थित अतिथियों एवं नागरिकों ने वृक्षों को राखी बांधकर उनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया।
इसके पश्चात समिति के अध्यक्ष डॉ. विवेक तिवारी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि विगत 25 वर्षों से रक्षाबंधन के अवसर पर वृक्षों को राखी बांधने की यह परंपरा पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनी है। नागरिकों की निरंतर बढ़ती सहभागिता ने इसे एक सामाजिक अभियान से जन-महोत्सव का स्वरूप प्रदान किया है।
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक, कुलपति, थावे विद्यापीठ, गोपालगंज (बिहार) एवं पूर्व अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग ने कहा कि वृक्ष केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि मानव जीवन के आधार हैं। वृक्षों की रक्षा करना वास्तव में अपने जीवन, भविष्य और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा करना है। रक्षाबंधन का पर्व हमें रिश्तों की रक्षा का संदेश देता है और वृक्ष रक्षाबंधन उसी भावना को प्रकृति तक विस्तार देता है।
देवाशीष घोष लाल्टू ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा गया कि- पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है। जब तक समाज वृक्षों को परिवार के सदस्य की तरह अपनाकर उनकी रक्षा का संकल्प नहीं लेगा, तब तक पर्यावरण संतुलन की चुनौती का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
विशिष्ट अतिथि पं. विष्णु कुमार तिवारी, कवि बुधराम यादव, डॉ. रमेश चंद्र श्रीवास्तव, कवि सनत तिवारी ने वृक्षों के संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी सामाजिक आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता ही स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है। इस अवसर पर डॉ सुनीता मिश्रा, डॉ अर्चना मिश्रा, डॉ. मंतराम यादव, डॉ राघवेंद्र दुबे एवं महेश श्रीवास ने भी पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता को लेकर अपने विचार व्यक्त किए।
समारोह के दौरान पर्यावरण विषयक काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसका संचालन डॉ विवेक तिवारी एवं पूर्णिमा तिवारी ने किया। काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि सनत तिवारी, डॉ. शत्रुघ्न जेसवानी, शीतल प्रसाद पाटनवार, मनोहर दास मानिकपुरी, बालगोविंद अग्रवाल, ध्रुव देवांगन, डॉ अंकुर शुक्ला, राजेश सोनार, अजय शर्मा धमनी, राजू कौशिक, डॉ. सुधाकर बिबे, डॉ सुनीता मिश्रा, सुषमा पाठक, पूर्णिमा तिवारी, रीना झा, आँचल पाण्डेय, विक्रमधर दीवान, सत्येन्द्र तिवारी, संतोष शर्मा, आशीष श्रीवास, बाली यदु सहित अनेक कवियों ने पर्यावरण एवं प्रकृति संरक्षण पर केंद्रित रचनाओं की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर नन्ही प्रतिभा अनाया एवं अमोघ शुक्ला ने विशेष प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का संचालन समिति के सचिव बालगोविंद अग्रवाल एवं बाली यदु ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ शत्रुघ्न जेसवानी ने किया।
समारोह में साहित्यकारों, पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कवियों एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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