आध्यात्मिक भाव के साथ , अतिथि का सम्मान करने वाला, बच्चों को संस्कार देने वाला, शक्तिशाली भारत देश बनाना है -डॉ कृष्ण गोपाल जी
बिलासपुर । ( वायरलेस न्यूज) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देवकीनंदन दीक्षित सभागृह में राष्ट्र निर्माण में हमारी भूमिका विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉक्टर कृष्ण गोपाल जी ने कहा है कि है संघ की शताब्दी वर्ष में अपने समाज को कुछ ऐसा बनाएं की कोई हमारी तरफ आंख उठाकर देखने की हिम्मत ना कर सके। हमें भारत को ऐसा शक्तिशाली देश बनाना है । आध्यात्मिक भाव के साथ अतिथि का सम्मान करने वाला ,माता-पिता की सेवा करने वाला ,बच्चों को संस्कार देने वाला भारत बनाना है। अपनी आमदनी का धन दूसरों की सहायता करने के लिए,ऐसा आध्यात्मिक समाज जो नशे से भी मुक्त हो, परिवार की चिंता करने वाला,हो ऐसा समाज बनाने का संकल्प लेना है। आज 100 बरस में देश में 2 लाख से अधिक शाखाएं संचालित करने का लक्ष्य है।
राष्ट्र निर्माण में हमारी भूमिका संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉक्टर कृष्ण गोपाल जी ने कहा है कि 100 बरस चलना आगे बढ़ते हैं। जो संगठन 1925 में शुरू हुआ हैं। आज आगे बढ़ रहा है। 40 लाख स्वयं सेवक समाज जीवन में बहुत सारे काम करते हैं। विदेश में काफी संख्या में स्वयंसेवक काम करते हैं। 80 से 85 देश में स्वयंसेवक हिंदू समाज को संगठित कर रहे हैं। वही के समाज के साथ मिलकर वहीं के समाज के लिए कुछ काम करना है लोगों को आश्चर्य लगता है। श्री कृष्ण गोपाल ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका, यूके ,जर्मनी ,ऑस्ट्रेलिया जापान, में हमारे स्वयंसेवक काम कर रहे हैं। डा गोपाल कृष्णने कहा कि हिंदू समाज में आत्मीयता की भावना होती है। धार्मिक स्थलों में लंगर भंडारे चलते हैं। हिंदू समाज सेवा भाव बनाने वाला समाज है। देश में आर्थिक विकेंद्रीकरण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को रोजगार मिले। 80 -90 प्रतिशत लोग अपने माता-पिता के पास रहे। लोग दूसरा राज्यों में पलायन करने जा रहे हैं। बच्चा अपने माता-पिता अपने गांव में रहे। इसलिए आरएसएस के द्वारा इस पर काम भी किया जा रहा है। संघ की शताब्दी वर्ष में अपने समाज को कुछ ऐसा बनाएं की कोई हमारी तरफ आंख उठाकर देखने की हिम्मत ना कर सके । ऐसा शक्तिशाली देश बनाना है आध्यात्मिक भाव के साथ अतिथि का सम्मान करने वाला माता-पिता किस की सेवा करने वाला बच्चों को संस्कार देने ऐसा आध्यात्मिक समाज जो नशे से भी मुक्त हो परिवार की चिंता करने वाला हो ऐसा समाज बनाना है।
भारत देश में उदारता का भाव आध्यात्मिक भाव, के साथ स्वयं सेवक काम कर रहे हैं। हमारे भारत देश में एक मौलिक सिद्धांत है। ईश्वर सर्वत्र व्यक्ति है प्रकृति में भी है। भारत का दर्शन ईश्वर को सर्वत्र मानना है। सृष्टि और श्रेष्ठा पर चर्चा की है। राष्ट्र निर्माण में हमारा योगदान संगोष्ठी में आरएसएस के विभाग कार्यवाह राजकुमार सचदेव, नगर प्रमुख प्रदीप शर्मा, भी मंच पर मौजूद थे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से नारायण नामदेव, सौमित्र गुप्ता, डॉ ललित माखीजा, महेंद्र जैन, किरण चावला, डॉ रजनीश पांडे, डॉ अवनीश त्रिपाठी,अरुणा दीक्षित, भृगु अवस्थी, के अलावा काफी संख्या में शहर के प्रबुद्ध जन संघ के पदाधिकारी कार्यकर्ता मौजूद थे।
शैली शुक्ला ने वंदे मातरम गीत गाया। राजीव श्रीवास्तव, श्रवण साहू ने संघ गीत तथा एकल गीत गाए ।
भारत ने किसी को लूटा नहीं, दूसरों पर आक्रमण भी नहीं किया
संघ यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने पर देवकीनंदन दीक्षित सभा भवन में संगोष्ठी को संबोधित करते हुए संघ के डॉक्टर कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि भारत के लोगों ने कभी किसी पर आक्रमण नहीं किया। किसी को लूटा नहीं है। देश के विभिन्न राजा महाराजा शक्तिशाली राजा की दुनिया में जाकर दूसरे को लूटने या गुलाम बनाने का काम नहीं किया। ऐसा कभी नहीं किया। भारत ने सिद्धांत बनाया है कि दूसरे का पैसा मिट्टी है। इसे छूनानहीं है। दूसरे परिवार की बालिका या महिला को मां की तरह सम्मान करना है। महिलाओं का सम्मान करना है। अध्यात्म और प्रार्थना करते-करते हम ईश्वर के रूप में चले गए। दुख और कष्ट की अनुभूति से ऊपर उठकर हम जी रहेहैं। आयु बढ़ती है तो मुक्ति की ओर यात्रा बढ़ जाती है । बुढ़ापे में मुक्ति की यात्रा चल रही है
पूरे विश्व को भारत ने बहुत कुछ दिया
संघ प्रमुख ने कहा कि ऐसा हिंदू समाज देश में विकसित हो रहा है। सबको ईश्वर में मानते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं। हम सारे जीवन में मोह माया से आगे बढ़ते हैं और अगली पीढ़ी को दायित्व देते हैं। पूरे विश्व में सबसे पहले लोहा भारत में बना। राष्ट्र निर्माण में हमारी भूमिका विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉक्टर कृष्ण गोपाल ने कहा की नई तकनीक के क्षेत्र में मिसाइल परमाणु, ऊर्जा ,मैथमेटिक्स, रसायन शास्त्र ने दुनिया को भारत ने दिया है । विवाह संस्कार भारत ने सिखाएं। यह संस्कार है। विवाह व्यवस्था परिवार व्यवस्था पूरे विश्व में हमने दिया। सात आठ हजार साल पहले से चल रहा है । खेती करना हमने सिखाया ,हल चलाना हमने सिखाए। भारत के अर्थव्यवस्था में विश्व में भारत का 34% योगदान है। एक और लेखक है अमेरिका का उसका नाम है जट सांडरलैंड, अमेरिकन लिटरेचर कहते हैं भारत का अपनी पुस्तक में जिक्र किया। अंग्रेज भारत में आए तो भारत कैसा था। दुनिया का सुंदर से सुंदर वस्तु भारत में बनती थी। शिव के कपड़े कारपेट पानी के जहाज स्टील तलवार भारत से दुनिया को जाता है।।
मसीह प्रार्थना , बौद्ध धर्म सिख धर्म सभी धर्म के चारों पर चर्चा करते हुए कहां की। भारत को सोने की चिड़िया को जो वाक्य आया है उसका भी जिक्र किया। 1000 वर्ष तो हमने लुटेरों को देखा। आतंक मचाया। बिना किसी कारण के लोग लौटते हैं दुनिया में ऐसे लोग भी हैं। दुनिया में बहुत सारे लोग हैं जो दूसरे देशों को गुलाम बनाते हैं दूसरे परिवार की लड़कियों को उठाकर जाते हैं गुलाम बनाते हैं। ऐसे लोग भी दुनिया में। एक हजार का कालखंड कठिनाइयों से जूझते रहे। आक्रमणकारी जहां भी जाते थे जिस देश में जाकर वहां सर्वनाश कर देते थे। गोदरेज नाना पालकी वाले सभी फारसी फारसी ईरान से भाग कर यहां आए थे। हमारे देश में 60000 फारसी भी हैं। बाकी दुनिया में नहीं है सभी मारेगए । 1000 वर्षों की कहानी पर कहां की बड़े-बड़े विश्वविद्यालय बड़े-बड़े पुस्तक कोई काम नहीं आते। तक्षशिला विश्वविद्यालय पर चर्चा करते हुए कहा कि आपकी सभ्यता चरित्र व्यवहार की कुशलता भी नम्रता शालिनी कुछ भी संगठित नहीं है तो। इस देश को ठीक करने से क्या करना है। सारे हिंदू समाज को संगठित करना है। दूसरे के विचार के सम्मान करने वाले इस देश में। सभी समाज एक दूसरे को सम्मान करते हैं। समाज के धर्मगुरु संत सभी एक दूसरे का सम्मान करते हैं। हमारे भारत में
सभी सुखी रहे, संभी धर्म को मारने वाला बनाने वाले सुखी रहे। प्रार्थना करते हैं। जैसा कर्म करोगे वैसा फल प्राप्त होगा। धरती को माता देवता मानते हैं। राष्ट्रीय भाव के कारणके एक दूसरे भाषा का गला नहीं काटता। विद्यासागर भी प्रवचन देते हैं। जेनमुनि ,गीता सभी ने प्रभावित किया।
राष्ट्रीयता और नागरिकता के अधिकार
डॉ कृष्ण गोपाल जी ने कहा की राष्ट्रीयता नागरिकता में वोट पाने का अधिकार, वोट डालने का अधिकार नौकरी और पढ़ने का अधिकार मिल सकता है। लेकिन इसलिए राष्ट्रीयता नहीं आती। राष्ट्रीय तथा भारतीय जब हम दूसरे का सम्मान करना सीखते हैं। सभी प्रकार के पूजा पद्धति को मानने वाले को सम्मान करना चाहिए ,यही राष्ट्र है ,यही राष्ट्रीयता की भावना है। मराठी, गुजराती में झगड़ा नहीं होता। दक्षिण भारत तथा उत्तर भारत आपस में झगड़ा नहीं करते। सैकड़ो भाषा हजारों बोली, राष्ट्रीय एकता का राष्ट्रीय भावना की प्रतीक है। तेलुगू दक्षिण भारत में दूसरे से झगड़ा नहीं होता। भाषा जरूर अलग है। कुंभ के मेले में ऐसे मिल जाएंगे जिनकी भाषा हम नहीं समझ सकते। गंगा में नहा कर चले जाते हैं। कोई भी बहाना हमें झगड़ा नहीं करती ,इसी का नाम है राष्ट्रीय।
डॉ कृष्ण गोपाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस बात को रखा है सारा समाज मिलकर का खड़ा होना चाहिए। किसी की कठिनाई में मिलकर खड़ा होना चाहिए। सारा समाज एकजुट हो जाए संघ इस पर काम कर रहा है। हमें 2 लाख शाखों को चालू करना है। समाज की चिंता करने वाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। देश में शिक्षा स्कूल एवं नई तकनीक पर चर्चा करते हुए कहा कि 12 प्रतिशत लोग शिक्षित रहा। पहले भारत में कोई भी मिसाइल नहीं बनती थी। तकनीक के क्षेत्र में हमारा देश अग्रणी है मिसाइल बनाने में हम अग्रणी है सेटेलाइट भेज रहे हैं। कंप्यूटर मोबाइल उसी से कम कर रहे हैं। सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए सबसे सस्ता भारत में है। हमारा इसरो बहुत मजबूत हो गया। जर्मन हमसे सैटेलाइट लांच कराता है। भारत के इंजीनियर दुनिया की बड़ी कंपनियों में काम कर रहे हैं। भारत के एयरपोर्ट वर्ल्ड क्लास है। जर्मनी फ्रांस और अमेरिका के लोग एयरपोर्ट की तारीफ करते हैं। हाईवे हमारे पास ,है हमारे टनल हमारे द्वारा 75 साल में हमने बड़ी तेजी से बढ़ रहा। कृष्ण गोपाल ने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ा अमेरिका यहां से हैवी वाटर लेता है। सुपर कंप्यूटर भी आज भारत बना रहा।। सस्ता सुपर कंप्यूटर भारत में, सुपर कंप्यूटर का अपग्रेड हो रहा है। भारत स्वतंत्र हुआ था वह डेढ़ करोड़ टन गेहूं उत्पादन होता था। भारत से गेहूं दूसरे देश से गेहूं मंगाया जाता था। गेहूं को सरकार बिक्री नहीं कर सकती थी। भारत का किसान अब पंजाब हरियाणा उत्तर प्रदेश में 12 करोड़ टन गेहूं के उत्पादन कर रहे हैं। शक्कर शक्कर लेने राशन दुकान में लाइन लगाते हैं आज भारत चीनी पैदा करता है। चार करोड़ टन चीनी पैदा।
हमारा देश बहुत अच्छे से उन्नति कर रहे हैं हमें क्या चाहिए चाहिए बना सकते हैं हमारे पास बहुत सारी टैलेंट है।
नशा मुक्ति पलायन और रोजगार पर चर्चा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरा होने पर दीक्षित सभा भवन में स्वास्थ्य को संबोधित करते हुए डॉक्टर कृष्ण गोपाल जी ने छत्तीसगढ़ नशाखोरी और पलायन पर भी चर्चा करते हुए कहा कि
बहुत सारे फील्ड है जहां बहुत अच्छी स्थिति में है। सारे देश के लिए स्वाभिमान की बातें। एक दृश्य और गरीब समाज भी है। जहां महीने में वेतन 10000 महीने से भी कम है। कुपोषण भी है महिलाएं एनीमिया के शिकार हैं। 80% ऐसे लोग कुछ भी करना नहीं जानते। 70% लोग कैसे हैं इंटर के बाद आगे बढ़ते नहीं है। उन्हें स्किल कौन सिखाया। छोटे-छोटे काम सिखाएंगे तो स्किल सेंटर की जरूरत है स्किल सेंटर की जरूरत है छोटे-छोटे उद्योगपति स्किल सेंटर शुरू कर सकते हैं। स्किल सेंटर में महिलाओं और युवाओं को रोजगार दिया जा सकता है। टेक्सटाइल के क्षेत्र में इंडस्ट्री लगा सकते हैं। टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम कर सकते रोजगार देने पर चर्चा करते हुए कहा कि नौकरी के लिए आगे जाने की जरूरत नहीं है छोटे-छोटे कर आगे बढ़ेंगे ।
संस्कार घर से देना चाहिए
नशाखोरी पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके पास संस्कार नहीं। पैसा है लेकिन संस्कार नहीं है पंजाब में भी लोग नशे के शिकार केरल में समस्या है। हरियाणा में समस्या है। हमारे घर का संस्कार देना चाहिए घर के बच्चे नशे में नहीं होना चाहिए । बच्चे अच्छे संस्कार वाले बनना चाहिए। अपने बच्चों को मिलकर। बच्चों को संस्कार वाला संस्कारवान बनाना। परिवार आज अलग रह रहे। इसका जिम्मेदार कौन है। अपने परिवार के बच्चों को विकसित करना है डेवलप करना है। पति-पत्नी एक साथ रहे परिवार भी संस्कारवान हो। घर में बूढ़े माता-पिता है बच्चा कहीं और रह रहे हैं। बच्चे विदेश में रह रहे हैं बड़े मां-बाप भारत में बैठे हैं उन्हें। इन समस्याओं का समाधान मिलकर करना है। इंदौर में बहुत साफ शहर है। सड़कों पर कचरा ना फेंकना चाहिए था । बच्चों को संस्कार वाला बनाने सड़क डस्टबिन नहीं डालें। संघ के शताब्दी वर्ष में सुनिश्चित किया है।
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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