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राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाते समय तथ्यों और प्रमाणों का सम्मान किया जाना चाहिए

On: September 29, 2026 9:52 AM

राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाते समय तथ्यों और प्रमाणों का सम्मान किया जाना चाहिए

मनेन्द्रगढ़। ( वायरलेस न्यूज) चुनाव आयोग के संयुक्त बयान ने विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम की स्थिति को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि “विपक्ष को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करना चाहिए।”

भाजपा श्रीमती चंपा देवी ने कहा कि “चुनाव आयोग के सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। SIR सहित चुनावी प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में आयोग के तीनों सदस्यों की सहमति रही है।” उन्होंने 24 जून 2025 के मूल आदेश से लेकर विभिन्न चरणों की समय-सारणी तक के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि आयोग ने इन्हें पूरी सहमति से लिए जाने की बात स्पष्ट की है।

उन्होंने कहा कि “विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग के निर्णयों में मतभेद होने का जो दावा किया जा रहा था, चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से वह दावा स्पष्ट नहीं रहता।” उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल तथ्यों के आधार पर ही उठाए जाने चाहिए।

कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर श्रीमती चंपा देवी ने कहा कि “इस पत्र को SIR या चुनाव आयोग की किसी नीतिगत प्रक्रिया से जोड़ना सही नहीं है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से संबंधित आंतरिक मामला था।”

एक अंग्रेजी दैनिक की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “किसी अपुष्ट अथवा तथ्यहीन रिपोर्ट को आधार बनाकर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं है।” स्रोत सामग्री के अनुसार आयोग ने संबंधित रिपोर्ट को तथ्यहीन और काल्पनिक बताया है।

फॉर्म-6 को लेकर भाजपा जिला अध्यक्ष ने कहा, “जनता के बीच फॉर्म-6 को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई, जबकि चुनाव आयोग ने इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।” उन्होंने कहा कि SIR से संबंधित घोषणा-पत्र तथा गैर-SIR अवधि में लागू नियमों को लेकर आयोग ने अलग-अलग स्थिति स्पष्ट की है।

उन्होंने मतदाता अधिकारों के विषय पर कहा कि “हर पात्र नागरिक को मताधिकार मिले, इसके लिए चुनाव आयोग जमीनी स्तर पर काम कर रहा है।” उन्होंने रैन बसेरों, मजदूरों और बेघर लोगों के लिए विशेष शिविर तथा छूटे हुए लोगों के घर जाकर बीएलओ द्वारा फॉर्म एकत्र किए जाने का उल्लेख किया।

श्रीमती चंपा देवी ने कहा कि “राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाते समय तथ्यों और प्रमाणों का सम्मान किया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद अब जनता के सामने संबंधित विषयों की स्थिति स्पष्ट है।

उन्होंने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि “संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के बजाय तथ्यों के आधार पर लोकतांत्रिक संवाद को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के संयुक्त बयान में SIR, प्रशासनिक पत्राचार और फॉर्म-6 से जुड़े विषयों पर स्थिति स्पष्ट की गई है।

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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