चिकित्सकों पर हो रहे हमलों के विरोध में 18 जून को पूरे देश भर में डॉक्टरों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। इंडियन मेडिकल एसोसियेशन डॉक्टरों पर हो रहे हमलों को लेकर आक्रोश में हैं, और हमलावरों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही चाहता है।
कोराना महामारी के दौरान संपूर्ण चिकित्सा जगत ने पहले दिन से ही कोरोनावायरस के खिलाफ युद्ध में अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर डटकर मुकाबला किया, और अपनी कोशिशों से देश के लाखों लोगों की जान बचाई। इस प्रयास में देश में कोरोना के दूसरी लहर में क़रीब 1400 से ज्यादा अनुभवी चिकित्सक इस कोवीड 19 के खिलाफ संघर्ष में शहीद हो गए। कोरोना महामारी के दौरान अपने सक्रिय योगदान के बावजूद हम सभी चिकित्सक बहुत दुखी और पीड़ा ग्रस्त हैं ,क्योंकि पिछले दिनों देश में बहुत से चिकित्सकों तथा चिकित्सा कर्मियों के ऊपर हिंसक आक्रमण किए गए ,और बहुतों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। बहुत से युवा चिकित्सकों, महिला चिकित्सकों, यहां तक की बहुत से पुराने अनुभवी चिकित्सकों के ऊपर भी आक्रमण हुए। इस तरह का व्यवहार वास्तव में अत्यधिक मानसिक आघात पहुंचा रहा है। सभी कुछ भूलकर समर्पित भाव से कार्य करते हुए बहुत से लोगों की जान बचाने के बावजूद इन हिंसक आक्रमणों में कई युवा चिकित्सकों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जिसका असर न सिर्फ अन्य चिकित्सकों पर हुआ बल्कि उन चिकित्सकों के परिवारों पर भी हुआ। उन्होंने बताया कि इसके विरोध स्वरूप 18 जून को सभी चिकित्सक काली पट्टी बांधकर तथा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा। जिलाधीश महोदय से ज्ञापन के जरिये मांग की गयी कि ड्यूटी के दौरान डॉक्टर तथा अन्य चिकित्सा कर्मियों पर आक्रमण करने वाले व्यक्ति को 10 साल की जेल की सजा का प्रावधान था (परंतु इसे मंत्री स्तरीय बैठक में निरस्त कर दिया गया) को तुरंत लागू किया जाए तथा इसमें आईपीसी और सीआरपीसी की धाराओं को भी शामिल किया जाए। ऐसे सभी प्रकरणों की जांच एक निश्चित समय सीमा के अंदर पूरी कर इस अपराध में शामिल लोगों को जल्द से जल्द सजा दी जाए ताकि असामाजिक तत्वों को चिकित्सा कर्मियों के ऊपर आक्रमण करने से हतोत्साहित किया जा सके। इसके अलावा जिन चिकित्सा कर्मियों ने कोरोना महामारी के दौरान अपनी जान गवाई है, उन्हें कोरोना शहीदों का दर्जा दिया जाए तथा उनको शहादत को उचित सम्मान दिया जाए। उनके परिवारों को सरकार की ओर से उचित सहायता दी जाए। चिकित्सा संस्थानों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए तथा वहां उचित सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध करवाई जाए। चिकित्सकों के साथ मारपीट करने वालों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाया जाये और सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से चिकित्सकों के विरुद्ध अनर्गल बयानबाजी करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाये। यदि इन मांगों पर शीघ्र ध्यान देकर उचित निर्णय नहीं लिए गए तो संभव है कि भविष्य में असुरक्षित वातावरण में जान जोखिम में डालकर कार्य करने की बजाय युवा चिकित्सा क्षेत्र में आना ही ना चाहें और समाज में योग्य चिकित्सकों की कमी हो जाए। असुरक्षित वातावरण में कार्य करने का एक परिणाम यह भी हो सकता है कि, चिकित्सक आपातकालीन स्थितियों में मरीजों का इलाज करने से स्वयं को अलग रखें, जिसका खामियाजा अंततः समाज को ही भुगतना पड़ेगा।
डॉ यशवंत कुमार शिंदे डॉ शिव कुमार नायक PRESIDENT (IMA ) SECRETARY
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