🇮🇳Odia
अन्तर्राष्ट्रीय अपराध खेल जगत छत्तीसगढ़ धर्म-कला-संस्कृति बिलासपुर मध्य प्रदेश महाराष्ट्र राष्ट्रीय रेलवे साक्षात्कार हाईकोर्ट अन्य

शिवाजी महाराज जैसा पराक्रम सब चाहते हैँ लेकिन उसे अर्जित करना कठिन है. आर एस एस प्रमुख डा मोहन भागवत , देश सर्वोपरि, हम सभी केवल जनसेवक, काशीनाथ गोरे की स्मृति में स्मारिका का विमोचन

On: August 31, 2025 3:27 AM

रत्नदीप बनकर काशीनाथ ने समाज के लिए जीवन समर्पित किया–डॉ मोहन भागवत……

शुद्ध सात्विक प्रेम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सौ वर्ष की यात्रा पूर्ण की……

स्व.काशीनाथ गोरे के जीवन कृतित्व पर केंद्रित स्मारिका का विमोचन संपन्न

बिलासपुर( वायरलेस न्यूज) छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान प्रेक्षागृह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व विभाग संघचालक स्व. काशीनाथ गोरे के जीवन कृतित्व पर केंद्रित स्मारिका का विमोचन पूजनीय सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत के करकमलों से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सांघिक गीत व भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्जवलन से हुआ। स्मारिका विमोचन समिति के सचिव विश्वास जलताड़े ने मंचस्थ अतिथियों का परिचय कराया।

इस अवसर पर सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने अपने उद्बोधन में कहा,बिलासपुर जब भी आया काशीनाथ की उपस्थिति अवश्य रहती थी।काशीनाथ गोरे संघ के स्वयंसेवक थे। ऐसा कहेंगे तो भी उनके जीवन का वर्णन पूर्ण हो जाता है, क्योंकि आद्य सरसंघचालक डॉक्टर साहब कहा करते थे, स्वयंसेवक का व्यक्तित्व ऐसा होता है जो लोगों को आकर्षित करता है। काशीनाथ से एक बार यदि कोई मिल लेता था तो उसके साथ एक आत्मीयता बन जाती है. वह रत्नदीप के समान समाज के उत्तम लोगों में थे।अच्छा काम करने में यश की भी अपेक्षा उन्हें नहीं थी।पूज्य गुरु जी कहा करते थे संघ में साधारण स्वयंसेवक सबसे महत्वपूर्ण है. एक घंटे की शाखा के बाद भी 23 घंटे उसका जीवन समाज के लिए उपयोगी होता है. संघ स्वयंसेवकत्व से चलता है. सभी बाधाओं व चुनौती में संघ को स्वयंसेवक ने बढ़ाया, संघ को अर्थात राष्ट्र व समाज को बढ़ाया. समाज में अपनत्व को जगाने का कार्य स्वयंसेवक करता है। प्रेम देकर शुद्ध सात्विक कार्य स्वयंसेवक विकसित करता है।अच्छे स्वयंसेवक के बारे में यही कहा जाता है कि वह अनुशासित, कर्मठ है।समाज में हो या घर में वह बिना मांगे सबकी सहायता करता है।
स्वयंसेवक के जीवन में सर्वे भवन्तु सुखिनः का दर्शन परिलक्षित होता है
इस अवसर पर उन्होंने कहा, शिवाजी महाराज जैसा पराक्रम सब चाहते हैँ लेकिन उसे अर्जित करना कठिन है. एक व्यक्ति के नाते परिवार को सूखी रखना, समाज को भी सँस्कारित करना है तो एक संतुलन चाहिए. ताना जी के सामने भी दुविधा आई थी कि कुटुंब को देखें या समाज को. मेरा कुल क्यों ठीक रहे, समाज हित के लिए, समाज राष्ट्र के लिए श्रेष्ठ बने. इसी चिंतन में सर्वे भवन्तु सुखिनः के दर्शन का साक्षात्कार होता है. ऐसी जिसकी प्राथमिकता सुनिश्चित हो जाती है, वह सबके लिए सज्जन शक्ति होते हैँ. सत्य स्वयंसेवक बनने के लिए जो निरंतर प्रयत्नशील रहते हैँ, उनका सामान्य जीवन भी अनुकरणीय व प्रेरक बन जाता है. काशीनाथ जी का व्यक्तित्व ऐसे ही सत्य स्वयंसेवक का था.
संघ को जीवन में चरितार्थ करने वाले सदपुरुष थे काशीनाथ
उन्होंने अपने संबोधन में कहा, काशीनाथ जी को दायित्व दिया गया हो या नहीं किन्तु समाज के लिए जो उपयोगी कार्य हो सकता था वह करते रहे. यथासंभव क्षमता से बिना किसी अपेक्षा से करते थे. सूर्य जैसा प्रखर होकर सारी दुनिया को प्रकाशमय करने वाला व्यक्तित्व भी होता है लेकिन अंधकार में दीप जैसा प्रकाशमान होना पड़ता है, उसकी आवश्यकता अधिक है. दीप जिस प्रकार जलकर प्रकाश देता है वैसे ही सदपुरुष होते हैँ. स्वयंसेवकों ने ऐसी शांत तपस्या की है. यह एक बहुत अच्छा संयोग है कि संघ की सौ वर्ष की यात्रा के दौरान ऐसे सदपुरुषों को हम याद कर रहे हैँ. संघ को प्रत्यक्ष अपने जीवन में चरितार्थ करने वाले लोगों के स्मरण का यह अवसर है।अब काशीनाथ नहीं हैँ लेकिन उनकी कीर्ति आज भी है। कीर्ति कभी समाप्त नहीं होती है।काशीनाथ के कृतित्व को हम नई पीढ़ी तक पहुंचाएंगे, जब-जब हमें प्रेरणा चाहिए हम पूर्वजों का स्मरण करते हैँ. इससे समाज का पुरुषार्थ जगता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने इस अवसर पर कहा,उन्होंने अपने जीवन का एक-एक क्षण राष्ट्र के लिए समर्पित किया। उन्होंने स्वयंसेवक, गृहस्थ, शासकीय सेवक हर भूमिका में आदर्श स्थापित किया. उनका पूरा परिवार राष्ट्र कार्य में जुटा रहा, वह परंपरा आज भी जारी है।उनके व्यक्तित्व का आज भी उदाहरण दिया जाता है। काशीनाथ ने मेरे जीवन समाज के प्रति दायित्व का बोध का वह भाव जगाया जिसने मेरे जीवन को दिशा दी।
स्मारिका विमोचन कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते, मध्य क्षेत्र प्रचारक स्वप्निल कुलकर्णी, सह क्षेत्र प्रचारक प्रेमशंकर, क्षेत्र समग्र ग्राम विकास प्रमुख अनिल डागा, क्षेत्र बौद्धिक शिक्षण प्रमुख नागेंद्र, प्रांत संघचालक डॉ टोपलाल, छत्तीसगढ़ के प्रांत प्रचारक अभय, विभाग संघचालक राजकुमार सचदेव समेत अनेक प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।स्मारिका विमोचन समिति के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा ने आभार प्रदर्शन किया।

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Latest entries

Join WhatsApp

Join Now

Join Facebook

Join Now

Leave a Comment