मंत्रिपरिषद ने पेंशन बंद करने का नहीं दिया था आदेश, गलत व्याख्या का आरोप


अनुदानित शिक्षक संघ ने 1 और 11 सितंबर के आदेश वापस लेने की मांग की, लंबित पेंशन तत्काल जारी करने की मांग
भिलाई, (वायरलेस न्यूज) शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों की पेंशन बंद किए जाने के मामले में अनुदानित शिक्षक संघ, कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय भिलाई ने नाराजगी जताई है। संघ के अध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा और सचिव डॉ. अनुराग पांडेय ने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा विभाग ने मंत्रिपरिषद के निर्णय की गलत व्याख्या करते हुए सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को पहले से मिल रही पेंशन से भी वंचित कर दिया है।


संघ पदाधिकारियों के अनुसार मंत्रिपरिषद के कार्यसूची-विवरण में उच्च शिक्षा विभाग का प्रस्ताव शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के पेंशनरों को उनके सेवानिवृत्ति के समय के वेतनमान के अनुरूप पेंशन एवं उपदान देने से संबंधित था। मंत्रिपरिषद ने इस प्रस्ताव को नियमों में प्रावधान तथा लोकहित में न होने के आधार पर अमान्य किया था। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय में लंबित प्रकरणों में उचित विधिक पैरवी करने का परामर्श दिया गया था।
संघ का कहना है कि इस निर्णय का अर्थ नई या संशोधित व्यवस्था के तहत पेंशन देने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलना है। मंत्रिपरिषद के निर्णय में पहले से स्वीकृत और वर्षों से प्रदान की जा रही पेंशन बंद करने का कोई निर्देश नहीं है। इसके बावजूद उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 1 सितंबर और 11 सितंबर 2026 को जारी आदेशों से वर्तमान पेंशन रोक दी गई। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी की पात्रता भी प्रभावित की गई है।
37 वर्षों से मिल रही पेंशन का हवाला
संघ ने कहा कि अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को राज्य शासन द्वारा लगभग 37 वर्षों से पेंशन एवं ग्रेच्युटी दी जा रही है। 26 अक्टूबर 2010 के शासनादेश के अनुसार पांचवें वेतनमान के आधार पर पेंशन तथा चौथे वेतनमान के आधार पर ग्रेच्युटी दिए जाने का उल्लेख करते हुए संघ ने कहा कि शिक्षकों की मांग केवल उनके सेवानिवृत्ति के समय लागू वेतनमान के अनुरूप पेंशन निर्धारण की रही है।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि पेंशन किसी प्रकार की दया या अनुग्रह राशि नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के बाद प्राप्त सामाजिक सुरक्षा का आधार है। वृद्धावस्था में अनेक सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारी चिकित्सा, दवाइयों तथा पारिवारिक जरूरतों के लिए पेंशन पर निर्भर हैं। जुलाई और अगस्त की पेंशन का भुगतान नहीं होने तथा सितंबर से पेंशन बंद होने से उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
आदेश वापस लेने और लंबित पेंशन भुगतान की मांग
अनुदानित शिक्षक एवं कर्मचारी संघ ने राज्य शासन से 1 सितंबर और 11 सितंबर 2026 के आदेशों को तत्काल वापस लेने, सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों की पूर्ववत पेंशन बहाल करने तथा जुलाई-अगस्त 2026 सहित सभी लंबित पेंशन का तत्काल भुगतान करने की मांग की है। इसके अलावा कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारियों की पेंशन तथा ग्रेच्युटी की पात्रता पूर्ववत सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
संघ ने मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि पेंशन शीघ्र बहाल नहीं की गई तो प्रभावित शिक्षक एवं कर्मचारी लोकतांत्रिक आंदोलन तथा उपलब्ध वैधानिक उपाय अपनाने के लिए बाध्य होंगे।
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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