भारतीय प्रवासी परिवारों के बदलते सामाजिक स्वरूप और पारिवारिक कल्याण पर हैदराबाद में अंतरराष्ट्रीय मंथन
आईसीएसएसआर समर्थित शोध परियोजना के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, शोध-पत्र प्रस्तुतीकरण, अकादमिक संवाद, हितधारक परामर्श एवं सावित्रीबाई फुले ग्लोबल सुपर-30 सम्मान समारोह आयोजित

हैदराबाद, ( वायरलेस न्यूज 21 सितंबर 2026) । भारतीय प्रवासी परिवारों में हो रहे सामाजिक, पारिवारिक एवं सांस्कृतिक बदलावों, पारिवारिक कल्याण तथा बदलती परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत प्रतिक्रियाओं पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार एवं हितधारक परामर्श का आयोजन हैदराबाद विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान विद्यालय के सम्मेलन कक्ष में किया गया। कार्यक्रम का विषय “भारतीय प्रवासी परिवारों में संक्रमण: सामाजिक परिवर्तन, पारिवारिक कल्याण एवं नीतिगत प्रतिक्रियाएँ” रहा।
यह कार्यक्रम एसआरएम विश्वविद्यालय, दिल्ली-एनसीआर, सोनीपत में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) के अंतर्गत संचालित शोध परियोजना के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन गोपाल किरन समाजसेवी संस्था (जीकेएसएसएस), ग्वालियर, एसआरएम विश्वविद्यालय, दिल्ली-एनसीआर, सोनीपत तथा भारतीय प्रवासी अध्ययन केंद्र, हैदराबाद विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, साहित्यकारों, शिक्षकों तथा सामाजिक एवं अकादमिक क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन से हुआ। सामूहिक वाचन के माध्यम से सामाजिक न्याय, समानता, स्वतंत्रता, बंधुता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। उद्घाटन सत्र में जी. सुनंदा जी को सावित्रीबाई फुले ग्लोबल सुपर-30 शिक्षा उत्कृष्टता एवं प्रेरणा सम्मान तथा स्मृति-चिह्न प्रदान किया गया।
उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि वैश्वीकरण, अंतरराष्ट्रीय प्रवास, शिक्षा, रोजगार, तकनीकी विकास और बदलती सामाजिक परिस्थितियों का भारतीय प्रवासी परिवारों की संरचना और जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप पारिवारिक संबंधों, पीढ़ियों के बीच संवाद, महिलाओं की भूमिका, बच्चों एवं युवाओं की सामाजिक पहचान तथा सांस्कृतिक निरंतरता से जुड़े नए प्रश्न सामने आ रहे हैं। इन परिवर्तनों को समझने के लिए बहुआयामी एवं शोध-आधारित दृष्टिकोण आवश्यक है।
प्रो. अजय के. साहू, प्रमुख, भारतीय प्रवासी अध्ययन केंद्र, हैदराबाद विश्वविद्यालय ने भारतीय प्रवासी समुदायों के अध्ययन की अकादमिक एवं सामाजिक प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने प्रवासी भारतीयों के बदलते सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन पर निरंतर शोध और संवाद की आवश्यकता को रेखांकित किया।
डॉ. संदीप कुलश्रेष्ठ, सह-प्रधान अन्वेषक, आईसीएसएसआर समर्थित शोध परियोजना, एसआरएम विश्वविद्यालय ने भारतीय प्रवासी परिवारों में सामाजिक परिवर्तन, पारिवारिक कल्याण और नीतिगत चुनौतियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। उन्होंने प्रवासी परिवारों की बदलती आवश्यकताओं को समझने के लिए सामाजिक विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों के बीच अंतर्विषयक अध्ययन को महत्वपूर्ण बताया।
शोध-पत्रों की प्रस्तुति और अकादमिक संवाद
सेमिनार में तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न राज्यों से आए शोधकर्ताओं एवं प्रतिभागियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। शोध-पत्रों में भारतीय प्रवासी परिवारों में सामाजिक परिवर्तन, पारिवारिक संबंध, महिलाओं की भूमिका, बच्चों एवं युवाओं की चुनौतियाँ, सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक न्याय, शिक्षा, सामाजिक विकास तथा नीतिगत आवश्यकताओं जैसे विभिन्न विषयों पर शोधपरक विचार प्रस्तुत किए गए।
डॉ. प्रियंका दत्ता, एसआरएम विश्वविद्यालय ने प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे शोध-पत्रों पर विषयगत एवं अकादमिक प्रश्न किए। उन्होंने शोध-पत्रों की विषयवस्तु, शोध-पद्धति, तर्क, संदर्भ एवं प्रस्तुतीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रतिभागियों के साथ संवाद किया तथा शोध-पत्रों को और अधिक तथ्यात्मक, व्यवस्थित, तार्किक एवं अकादमिक रूप से मजबूत बनाने के लिए आवश्यक सुझाव दिए। प्रश्नोत्तर एवं विशेषज्ञ सुझावों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने शोध को अधिक स्पष्ट, प्रमाण-आधारित और प्रभावी बनाने का अवसर मिला।
शोध-पत्र सत्र में के. अंबुजाक्षन, अंबेडकराइट डेमोक्रेटिक फ्रंट, गया, केरल तथा तहुरा नाज़ सहित विभिन्न प्रतिभागियों ने भी अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। प्रस्तुत शोधों में प्रवासी भारतीय परिवारों में बदलते सामाजिक संबंधों, महिलाओं की भूमिका, पारिवारिक जीवन, सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक पहचान और नई पीढ़ी की चुनौतियों को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने का प्रयास किया गया।
हितधारक परामर्श में सामाजिक एवं नीतिगत मुद्दों पर चर्चा
हितधारक परामर्श सत्र में अकादमिक जगत, सामाजिक क्षेत्र और शोध से जुड़े प्रतिभागियों ने अपने अनुभव एवं सुझाव साझा किए। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि भारतीय प्रवासी परिवारों से जुड़े मुद्दों को केवल आर्थिक प्रवास के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उनके सामाजिक, पारिवारिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और लैंगिक आयामों को भी शोध एवं नीति विमर्श में पर्याप्त स्थान दिया जाना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि प्रवासी परिवारों के बदलते स्वरूप को समझने के लिए परिवार, समुदाय, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, सामाजिक संगठनों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद को मजबूत करने की आवश्यकता है। विशेष रूप से नई पीढ़ी की सांस्कृतिक पहचान, महिलाओं की बदलती भूमिका, पीढ़ियों के बीच संबंध और पारिवारिक कल्याण जैसे विषयों पर निरंतर अध्ययन की आवश्यकता महसूस की गई।
“विकास क्षितिज” पुस्तक का विमोचन और सांस्कृतिक प्रस्तुति
कार्यक्रम के दौरान “विकास क्षितिज” पुस्तक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर साहित्य एवं अकादमिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों ने पुस्तक के महत्व पर विचार व्यक्त किए।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत श्रुति बालाजी चांबुले द्वारा भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी गई। भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आयाम जोड़ा। कार्यक्रम का संचालन गया बाई चुम्बले ने किया।
सावित्रीबाई फुले ग्लोबल सुपर-30 सम्मान समारोह
सेमिनार के साथ “सावित्रीबाई फुले ग्लोबल सुपर-30 शिक्षा उत्कृष्टता एवं प्रेरणा सम्मान” समारोह भी आयोजित किया गया। शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, संस्कृति, साहित्य, लेखन, सामाजिक कार्य, शोध, वित्तीय शिक्षा, डिजिटल एवं रचनात्मक क्षेत्र तथा समाज में सकारात्मक योगदान देने वाले विभिन्न व्यक्तित्वों एवं प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
उद्घाटन सत्र में जी. सुनंदा जी को सावित्रीबाई फुले सम्मान एवं स्मृति-चिह्न प्रदान किया गया।
श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने बताया आयोजन का उद्देश्य
गोपाल किरन समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने कहा कि भारतीय प्रवासी परिवार केवल आर्थिक प्रवास का विषय नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन, सांस्कृतिक निरंतरता, पारिवारिक संबंधों, लैंगिक समानता, शिक्षा और नई पीढ़ी की पहचान से जुड़े व्यापक सामाजिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि प्रवासी परिवारों से संबंधित विषयों पर विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, सामाजिक संगठनों, नीति-निर्माताओं और समुदाय के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल विचारों का आदान-प्रदान करना नहीं, बल्कि शोध, अकादमिक ज्ञान और जमीनी अनुभवों को जोड़कर भविष्य के लिए उपयोगी सुझाव विकसित करना भी है।
श्री निमराजे ने कहा कि आईसीएसएसआर समर्थित शोध परियोजना के अंतर्गत आयोजित इस अकादमिक पहल में शोध-पत्रों की प्रस्तुति, विशेषज्ञों द्वारा प्रश्नोत्तर, शोध-पत्रों को बेहतर बनाने के सुझाव तथा हितधारकों के अनुभवों का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि शोध को तथ्य, प्रमाण, संदर्भ और वैज्ञानिक शोध-पद्धति के आधार पर और अधिक मजबूत बनाया जाना चाहिए, ताकि उसका उपयोग सामाजिक विमर्श एवं नीति संबंधी चर्चाओं में किया जा सके।
कार्यक्रम में प्रो. अजय के. साहू, प्रो. गजेंद्र पाठक, डॉ. संदीप कुलश्रेष्ठ, डॉ. प्रियंका दत्ता, डॉ. सुधांशु कुमार चक्रवर्ती, डॉ. संजीव यादव, भवानी राज (मुन्ना) सहित अनेक शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं प्रतिभागियों की सहभागिता रही।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने भारतीय प्रवासी परिवारों से संबंधित विभिन्न सामाजिक एवं अकादमिक पहलुओं पर विचार साझा किए तथा भविष्य में ऐसे विषयों पर और अधिक शोध एवं संवाद आयोजित करने की आवश्यकता व्यक्त की।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर गोपाल किरन समाजसेवी संस्था (जीकेएसएसएस), ग्वालियर की ओर से हैदराबाद विश्वविद्यालय, एसआरएम विश्वविद्यालय, भारतीय प्रवासी अध्ययन केंद्र, सभी अतिथियों, शोधकर्ताओं, सम्मानित व्यक्तित्वों, प्रतिभागियों एवं कार्यक्रम से जुड़े सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन भारतीय प्रवासी परिवारों में हो रहे सामाजिक एवं पारिवारिक परिवर्तनों को अकादमिक शोध, सामाजिक अनुभव और हितधारकों के संवाद से जोड़ने का एक प्रयास रहा। सेमिनार में प्रस्तुत शोध-पत्रों, विशेषज्ञों के प्रश्नोत्तर एवं सुझावों तथा हितधारक परामर्श से प्राप्त विचार भविष्य के अध्ययन और सामाजिक विमर्श के लिए उपयोगी आधार प्रदान कर सकते हैं।
Author Profile

- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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