अमरकंटक में विश्व के प्रथम महामेरु प्रस्तार श्रीयंत्र मंदिर का निर्माण पूर्ण
23 से 26 अक्टूबर तक होगा प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव, देश-विदेश से जुटेंगे संत, आचार्य और श्रद्धालु

अमरकंटक/अनूपपुर (मनोज द्विवेदी वायरलेस न्यूज) । मां नर्मदा की उद्गम नगरी अमरकंटक की पावन धरती पर करीब तीन दशक की साधना और निर्माण यात्रा के बाद श्रीयंत्र महामेरु शक्तिपीठ मंदिर का निर्माण पूर्ण हो गया है। आगामी 23 से 26 अक्टूबर 2026 तक मंदिर में पूर्ण विधि-विधान के साथ प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित किया जाएगा।
आयोजन को लेकर मंदिर परिसर सहित अमरकंटक नगर में तैयारियां और सजावट का कार्य तेजी से चल रहा है।

सोनमूड़ा रोड स्थित इस भव्य श्रीयंत्र महामेरु मंदिर को भारतीय प्राचीन उपासना पद्धति, वास्तुशास्त्र, तंत्र विज्ञान, गणित और आध्यात्मिक परंपरा का अनूठा संगम बताया जा रहा है। महोत्सव की तैयारियां हरिद्वार के संत एवं श्रीयंत्र मंदिर-बटे कृष्ण आश्रम अमरकंटक के प्रमुख महंत श्री शरद पुरी महाराज के मार्गदर्शन में शिष्यगण, भक्तों और नगरवासियों द्वारा की जा रही हैं। आयोजन में देश-विदेश से संतों, आचार्यों, अतिथियों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
तीन दशक पहले शुरू हुआ था निर्माण
श्रीयंत्र मंदिर के निर्माण का कार्य ब्रह्मलीन संत श्री श्री 1008 अटल पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी शुकदेवानंद जी महाराज के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में लगभग तीन दशक पहले शुरू हुआ था। लंबे समय तक चले निर्माण के बाद अब मंदिर अपने पूर्ण स्वरूप में तैयार है।
आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार अमरकंटक में निर्मित यह मंदिर महामेरु प्रस्तार की विशिष्ट संरचना पर आधारित है। मंदिर का आधार पद्मबंध, मध्य भाग त्रिकोणात्मक रचना तथा शीर्ष भाग देवबंध के स्वरूप में निर्मित किया गया है। चारों कोनों पर कालतत्व सहित विभिन्न प्रतीकात्मक आकृतियों का अंकन किया गया है।
52 फीट लंबा, चौड़ा और ऊंचा मंदिर
महाशक्ति मंडल में निर्मित श्रीयंत्र महामेरु मंदिर की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई लगभग 52-52 फीट बताई गई है। मंदिर की संरचना में श्रीयंत्र के विभिन्न ज्यामितीय एवं आध्यात्मिक स्वरूपों को समाहित किया गया है।
मंदिर के शीर्ष भाग में श्रीयंत्र की विभिन्न आवरण संरचनाओं को अत्यंत कलात्मक ढंग से उकेरा गया है। इनमें त्रिकोण, अष्टकोण, अंतर्दशार, बहिर्दशार, चतुर्दशार, अष्टदल, षोडशदल, वृत्त, बिंदु और भूपुर जैसी संरचनाएं शामिल हैं। मंदिर के चारों कोनों पर सिंहों की आकृतियां तथा नाग सहित अन्य प्रतीकात्मक आकृतियां भी निर्मित की गई हैं।
मां त्रिपुर सुंदरी होंगी अधिष्ठात्री
श्रीयंत्र की अधिष्ठात्री आदि शक्ति श्री महात्रिपुर सुंदरी की पूजा एवं प्रतिष्ठा मंदिर में की जाएगी। गर्भगृह में देवी की प्रतिमा स्थापित किए जाने की योजना है। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं को विधि-विधान के अनुसार देवी की पूजा-अर्चना का अवसर मिलेगा।
‘पांचवें धाम’ के रूप में विकसित करने की परिकल्पना
आयोजन समिति से जुड़े गिरि वनवासी विकास संस्थान के सदस्य त्रिभुवेन्द्र कुमार दास के अनुसार श्रीयंत्र महामेरु मंदिर को जगन्नाथ, रामेश्वरम्, बद्रीनाथ और द्वारिका की परंपरा में एक विशिष्ट आध्यात्मिक केंद्र तथा ‘पांचवें धाम’ के स्वरूप में विकसित करने की परिकल्पना है।
मंदिर की संरचना में वास्तुशास्त्र, गणित, तंत्र विज्ञान, कला-कौशल और वेदांत के विभिन्न पक्षों को समाहित किया गया है। मंदिर परिसर को पृथ्वी एवं ग्रहों की गणना तथा उनकी गति संबंधी ज्ञान के अध्ययन के केंद्र के रूप में विकसित करने की भी परिकल्पना बताई गई है।
सघन वनांचल, पर्वतीय भूभाग और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित यह मंदिर अमरकंटक की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। अब 23 से 26 अक्टूबर तक होने वाले प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव पर देशभर की नजरें रहेंगी।
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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