🇮🇳Odia
अन्तर्राष्ट्रीय अपराध खेल जगत छत्तीसगढ़ धर्म-कला-संस्कृति बिलासपुर मध्य प्रदेश महाराष्ट्र राष्ट्रीय रेलवे साक्षात्कार हाईकोर्ट अन्य

*अंदरूनी कलह से जुझ रही सीपीआई माओवादी संगठन द्वारा जनता एवं मीडिया का ध्यान भटकाने हेतु निर्दोष ग्रामीणों की हत्या, वाहन और मशीनों को जलाना जैसी कायराना हरकतों से अपनी झूठी ताकत का प्रदर्शन करने का असफल प्रयास की जा रही है:आई जी पी. सुंदरराज*

On: April 20, 2021 8:48 AM

*● सीपीआई माओवादियों संगठन की खात्मा के डर से पगला गये है बसवराजू एवं उनके लुटेरे दल।

*● DKSZC के दिशाविहीन एवं नेतृत्वविहीन माओवादी संगठन को निर्दोष एवं निहत्थे आदिवासी ग्रामीणों में दुश्मन नजर आ रहा है।

*● आदिवासियों की हित की लड़ाई के नाम पर आदिवासियों की हत्या से बेनकाब हो रही है माओवादियों का ‘‘जनसंहार’’ चेहरा।

*● बस्तर की अंदरूनी एवं सीमावर्ती ईलाकों में जनसुविधा हेतु निर्माण की जा रही सड़क एवं पुल-पुलियों से बसवराजू, सुजाता, हरिभूषण, गणेश उइके, रामचंद्र रेड्डी जैसे बाहरी माओवादी कैडर्स में घबराहट छाया।

*●माओवादियों के दावा अनुसार बस्तर के अंदरूनी क्षेत्र की जनता यदि उन्हें समर्थन दे रही है, तो फिर निर्दोष एवं निहत्थे आदिवासियों की हत्या क्यों करना पड़ रहा है?
जगदलपुर 20 अप्रैल 2021
वायरलेस न्यूज अरुण पाढ़ी/
विगत वर्षों में बस्तर संभाग के घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र जैसे मिनपा, तर्रेम, धरमावरम, गलगम, पोटाली, बोदली, कड़ेमेटा, सोनपुर, कोहकामेटा, कटगांव, कामतेड़ा, कोलेंग जैसे कुल 24 स्थानों पर सुरक्षा कैम्प स्थापित किया जाकर क्षेत्र की जनता की मांग अनुसार सड़क, पुल-पुलिया, बिजली आपूर्ति एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं उपलब्ध कराई जा रही है। शासन की इस कार्ययोजना के फलस्वरूप विगत वर्षों में लगभग 08 हजार वर्ग किलोमीटर में नक्सल संगठन के माओवादियों कब्जा से समाप्त किया जाकर स्थानीय जनता को राहत दी गई। यदि ये कार्ययोजना सफल हो गये तो आने वाले चंद वर्षों में दण्डकारण्य क्षेत्र से माओवादी संगठन विलोपित हो जाने की डर से सीपीआई माओवादियों संगठन के महासचिव बसवराजू एवं उनकी लुटेरे दल बौखलाहट में है।

जैसे चीन देश में 1954 से लेकर 1976 तक अपना सत्ता को काबिज रखने के लिए माओसे-तुंग द्वारा लाखो नागरिक को निर्भीक हत्या की गई, वैसी ही दण्डकारण्य क्षेत्र में विगत वर्षों में खो रही जनाधार को पुनः हासिल करने हेतु बसवराजू, सुजाता, हरिभूषण, गणेश उइके, रामचंद्र रेड्डी जैसे माओवादियों की तेलगु नेतृत्व द्वारा हिड़मा, पापाराव, देवा, विनोद, मनीला, जगदीश जैसे स्थानीय कैडर्स को इस्तेमाल कर दण्डकारण्य क्षेत्र में निर्दोष एवं निर्भीक आदिवासी ग्रामीण की हत्या कर प्रताड़ित किया जा रहा है। स्थानीय माओवादी एवं मिलिशिया कैडर द्वारा सीपीआई माओवादियों की तेलगु नेतृत्व के बस्तर क्षेत्र में आदिवासियों को ‘‘जनसंहार’’ करने जैसी इस साजिश को बिना समझे उनके आका के आदर्शों को आंख मुंदकर पालन किया जाकर खुद अपने समाज की निर्दोष ग्रामीणों के ऊपर दमन व अत्याचार किया जा रहा है।

दिसम्बर, 2019 में तत्कालीन दण्डकारण्य स्पेशल जोन कमेटी के सचिव रमन्ना के मृत्यु के पश्चात् दण्डकारण्य क्षेत्र में स्थानीय आदिवासी कैडर को DKSZC सचिव बनाने की मांग करने वाला मुड़ियामी विज्जा जैसे अनेेक आदिवासी माओवादी कैडर्स को बसवराजू एवं उनके दल द्वारा हत्या करवा दी गई। इस प्रकार अंदरूनी कलह से जुझ रही सीपीआई माओवादी संगठन द्वारा जनता एवं मीडिया का ध्यान भटकाने हेतु निर्दोष ग्रामीणों की हत्या, विकास कार्यों हेतु इस्तेमाल वाहन और मशीनों को जलाना जैसी कायराना हरकतों से अपनी झूठी ताकत का प्रदर्शन करने का असफल प्रयास की जा रही है। ये सब गतिविधि से स्पष्ट है कि बसवराजू सीपीआई माओवादी संगठन की वर्ष 2018 से नेतृत्व संभाल रहे है तब से माओवादी संगठन दिशाविहीन एवं नेतृत्वविहीन हो चुका है।

बस्तर की जनता माओवादी नेतृत्व के ऊपर सवाल उठा रहे है कि ‘‘यदि जनता आपके समर्थन कर रहे तो उनकी हत्या करने आवश्यकता है क्या?’’ इसका मतलब है कि माओवादियों संगठन को बिल्कुल जनसमर्थन नहीं मिल रहा है, इसी गुस्सा में किसी भी निर्दोष ग्रामीण की हत्या कर भय का वातावरण निर्मित करने का माओवादी द्वारा कायराना हरकत की जा रही है। तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार एवं झारखण्ड जैसे बाहर प्रांतो से भरा हुआ माओवादियों की सेन्ट्रल एवं पोलित ब्यूरो में छत्तीसगढ़ के स्थानीय कैडर्स का एक भी स्थान न देकर उन्हें सिर्फ दिग्भ्रमित एवं गलत जानकारियों से गुमराह कर खुद आदिवासी कैडर्स से स्थानीय आदिवासी जनता का दमन करना बसवराजू का असली चेहरा धीरे-धीरे बेनकाब हो रहा है।

वर्ष 2021-22 हम सब के लिए काफी महत्वपूर्ण एवं निर्णायक होगा। यह वक्त है कि बस्तर की सभी शुभचिंतक एकजूट होकर माओवादियों की जनविरोधी, आदिवासी विरोधी और विकास विरोधी हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देकर स्थानीय जनता को नक्सल आतंक से मुक्ति दिलाने की। बस्तर में शांति व्यवस्था स्थापित करना तथा जनता की जानमाल की रक्षा करने का दायित्वों को पुलिस बल, समस्त सुरक्षाबल एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा दृढ़ संकल्पित होकर निभाएंगे।

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Latest entries

Join WhatsApp

Join Now

Join Facebook

Join Now

Leave a Comment