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नुआखाई विशेष :-श्रमशक्ति गरीब, मजदूर, किसानों का महापर्व है – भगवानू नायक

On: September 10, 2021 4:54 PM

सामाजिक सदभाव, सामाजिक एकता और भाईचारा का पर्व है नुआखाई

मानव और प्रकृति के अटूट रिश्तों की झलक दिखलाता है नुआखाई पर्व

शनिवार को धूमधाम नुआखाई ,रविवार को जुहार भेंट

✍🏻 रायपुर (वायरलेस न्यूज़ ) छत्तीसगढ़, दिनांक 10 सितंबर 2021। जनता काँग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के मुख्य प्रवक्ता, सामाजिक नेता भगवानू नायक ने प्रदेश वासियों को श्रमशक्ति गरीब, मजदूर और किसानों के महापर्व नुआखाई की शुभकामनाएँ देते हुए कहा छत्तीसगढ़ में शनिवार दिनांक 11 सितंबर को नुआखाई पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। नए फसल से नए अन्न आने की खुशी में इस दिन घर में नवान्न को पूजा-अर्चना कर अपने ईष्ट देवी-देवताओं और पूर्वजों को भोग लगाकर अच्छे फसल के साथ परिवार, समाज, देश प्रदेश की उन्नति की कामना किया जाएगा । नायक ने कहा पश्चिम ओडिशा और छत्तीसगढ़ दोनों ही प्रदेश की संस्कृति में काफी समानता है इसलिए भी यह पर्व पश्चिम ओडिशा और छत्तीसगढ़ में धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अलावा देश के अनेक राज्यों सहित सात समंदर पार भारतवासी भी इस पर्व को धूमधाम से मनाते है। भगवानू नायक ने कहा नुआखाई का पर्व प्रतिवर्ष भाद्रपद महीने के पंचमी तिथि को गणेश चतुर्थी के एक दिन बाद मनाया जाता है, यह दिन हर साल लगभग अगस्त-सितंबर के बीच पड़ता है। कोसली भाषा में “नुआ” का अर्थ “नया” और “खाई” का अर्थ “खाना” होता है अर्थात नए अन का ग्रहण करना। नुआखाई में ईष्ट देवी देवताओं औऱ पूर्वजों की पूजा अर्चना करते हैं और मनमुटाव को भुलाकर, आपसी भाईचारा,सामाजिक-सदभाव और सामाजिक एकता का परिचय देते है। उन्होंने कहा देश में मुख्य रूप से पश्चिम ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार के द्वारा नुआखाई के अवसर पर ऋषि पंचमी के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जा चुका है परंतु अविभाजित मध्यप्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व मोतीलाल वोरा सरकार के द्वारा सप्तमी में ऐच्छिक अवकाश की घोषणा की गई है जिसे ऋषि पंचमी की सार्वजनिक अवकाश प्रदान करने की मांग वर्षो से लंबित है आशा है किसानों के नाम विभिन्न योजनाएं चलाने वाली भूपेश सरकार भी ऋषि पंचमी के दिन नुआखाई को सार्वजनिक घोषणा करेगी।

विशेषकर नौ रस्म-रिवाजों में पूरा होता है नुआखाई त्योहार :-

लिपा पूछा : इस रस्म में सभी लोग अपने घरों की साफ-सफाई अच्छे से करते हैं। घर के सामने को गोबर पानी से लिपते हैं और घरों की पुताई करते हैं कहते है इससे घर मे सुख शांति का वास होता है।

घिना बिका : यह वह समय होता है जब पर्व के लिए लोग नए नए कपड़े खरीदते हैं, खान-पान के लिए पूजा सामग्री आदि खरीदते हैं।

नुआधान खुजा : पर्व के एक-दो दिन पहले नुआखाई के लिए नए धान खोजते हैं। कभी-कभी समय पर सबका धान नहीं पका होता है इसलिए वे अपने गांव के दूसरे किसी खेत से भी धान खरीद लाते हैं और इस पर्व के लिए उसे सूखा कर रखते हैं। आजकल बाजारों में भी यह धान बिकता है।

बेहेरेन : यह वह रस्म होता है जिसमें सभी नुआखाई मनाने वाले लोग इकट्ठा होते हैं और पर्व के उत्सव के सही समय के बारे में बातचीत करते हैं।

लगन-देखा : सभी मिलकर एक निर्धारित समय को चुनते हैं जिस समय सभी मिलकर एक साथ बाद में नुआखाई के दिन नवान्न ग्रहण करते हैं।

बाली पकाः यह नुआखाई पर्व का वह महत्वपूर्ण समय होता है जब सभी लोग घर में बने पिदर में देवी-देवताओं और पूर्वजों को नवान्न से बना प्रसाद चढ़ाते हैं।

नुआखाई : उसके बाद सभी परिवार के लोग शुभ मुहूर्त का इंतजार करते हैं और समय आने पर सभी लोग एक साथ बैठ कर कुरे पत्ता में नुआ चुरा प्रसाद खाते हैं। यह बहुत ही सुंदर समय होता है जब परिवार के लोगों में खुशी की लहर होती है। सभी लोग नाचते हैं गाते हैं और कुरे पत्ते से बने दोना या प्लेट में पारंपरिक व्यंजनों के सात खाकर खाकर खुशियां मनाते हैं।

डका-हका : यह वह रस्म होता है जिसमें सभी लोग अपने परिवार और आसपास के अन्य लोगों को भी नुआखाई के दिन एक-साथ नवान्न से बना प्रसाद व भोजन करने के लिए आमंत्रित करते हैं एक साथ प्रसाद और भोजन ग्रहण करते है।

जुहार भेट : जुहार-भेंट के साथ इस सुंदर पर्व का अंत होता है। यह रस्म इतना अच्छा होता है कि इसमें लोग अपने पुराने वाद विवाद और मनमुटाव को भुला कर बड़े बुजुर्गों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिए है एक दूसरों के गले मिलते है। वर्तमान में पर्व के समाप्त्त होने के बाद एक तिथि निर्धारित कर नुआखाई मिलन समारोह मनाते हैं इस दौरान नाच गाना समेत सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

नुआखाई की हार्दिक शुभकामनाएं🙏🏻

अधिवक्ता भगवानू नायक
(सामाजिक नेता)

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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