रायगढ़(वायरलेस न्यूज) । रायगढ़ जिले में बढ़ते जंगली हाथियों की संख्या से उनके उत्पात की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही है। इसी क्रम में जंगली हाथियों के एक दल ने तमनार परिक्षेत्र के पडकीपहरी गांव में तीन ग्रामीणों के मकान को ढहा दिया है। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर आगे की कार्रवाई करने में जुट गई है।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार तमनार वन परिक्षेत्र के के झिंगोल क्षेत्र के कक्ष क्रमांक 844 में इन दिनों 16 जंगली हाथियों के दल ने डेरा जमाया हुआ है। इन जंगली हाथियों के दल ने बुधवार की देर रात इस क्षेत्र में पडकीपहरी गांव के तीन ग्रामीणों के मकानों को नुकसान पहुंचाते हुए नुकसान पहुंचाया गया है। जिनके मकानों को जंगली हाथियों ने नुकसान पहुंचाया है उनमें चैतराम पिता तिलकराम चैहान साकिन पडकीपहरी, संपत्ति पति शनिराम चैहान साकिन पडकीपहरी के अलावा गणेशराम पिता बाग सिंह राठिया साकिन पडकीपहरी के मकानों को जंगली हाथियों के द्वारा नुकसान पहुंचाया गया है। इससे पहले भी बंगुरसिया क्षेत्र में एक जंगली हाथी ने एक ही रात में चार ग्रामीणों को मकानों को ढहाते हुए कटहल और आम के पेड़ो को नुकसान पहुंचाया गया है। इन दिनों जंगली हाथी भोजन की तलाश में लगातार गांव की ओर रुख कर रहे हैं और फिर इस तरह की घटनाओं को उनके द्वारा अंजाम दिया जा रहा है।
तमनार परिक्षेत्र में जंगली हाथियों के द्वारा तीन मकानों को ढहाने की सूचना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर लोगों को जंगली हाथी के गांव पहुंचने पर उससे दूरी बनाये रखने की बात कहते हुए आगे की कार्रवाई में जुट गई है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जंगली हाथियों का यह दल अभी झिंगोल क्षेत्र में विचरण कर रहा है और आगे कसडोल, सामारूमा, कांटाझरिया, भैंसगढ़ी, पंूजीपथरा, तराईमाल की तरफ जाने की संभावना जताई जा रही है। जंगली हाथियों के इस दल में 09 मादा, 03 नर और 04 शावक कुल मिलाकर 16 हाथी अभी झिंगोल क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं।
क्या कहते हैं वनपरिक्षेत्र अधिकारी
इस संबंध में तमनार परिक्षेत्र के रेंजर सीआर राठिया से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 16 जंगली हाथियों का दल विचरण कर रहा है। वन विभाग के द्वारा लगातार गांव-गांव में मुनादी कराकर ग्रामीणों को जंगल तरफ नही जाने की समझाईश दी जा रही है। साथ ही साथ गांव में हाथी आने से उससे दूरी बनाये रखने की बात कही जा रही है ताकि जनहानि की घटना घटित न हो।
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- अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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