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नवसाक्षर लेखन कार्यशाला’ का राजीव गांधी वि.वि. ईटानगर के कुलपति प्रो जयदेव साहु तथा राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, के मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक ने किया उद्घाटन*

On: November 12, 2025 10:46 AM

*‘नवसाक्षर लेखन कार्यशाला’ का राजीव गांधी विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो जयदेव साहु तथा राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत, के मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक ने किया उद्घाटन*

*( वायरलेस न्यूज नेटवर्क) ईटानगर के राजीव गांधी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सहयोग से अरुणाचल प्रदेश में प्रथम नवसाक्षर लेखन कार्यशाला का किया जा रहा है आयोजन*

*दोईमुख, ईटानगर।* अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत की पहली बार हिंदी के रचनाकारों की ‘नवसाक्षर लेखन कार्यशाला’ का आयोजन राजीव गांधी विश्वविद्यालय, दोईमुख, ईटानगर में 12 से 14 नवंबर, 2025 को राजीव गांधी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग तथा नेशनल बुक ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत आज दिनांक 12 नवंबर, 2025 को विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा विभाग में राजीव गांधी विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. जयदेव साहू तथा राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक श्री कुमार विक्रम ने उद्घाटन कर शुभारंभ किया।

‘नवसाक्षर लेखन कार्यशाला’ के उद्घाटन के दौरान मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक श्री कुमार विक्रम ने न्यास की परंपरानुसार कार्यशाला में आए विद्वानों तथा लेखकों को पुस्तकें भेंट व शॉल ओढ़कर स्वागत किया। कार्यशाला का संचालन कार्यशाला प्रभारी डॉ. ललित किशोर मंडोरा ने किया।

‘नवसाक्षर लेखन कार्यशाला’ के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए राजीव गांधी विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. जयदेव साहू ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में इस तरह की नवसाक्षरों के लिए किया गया प्रयास सराहनीय है। अरुणाचल प्रदेश हिंदी के क्षेत्र में बहुत अच्छा काम कर रहा है, यहाँ के साहित्यकार, कवि निरंतर हिंदी में लेखन कर रहे हैं। नेशनल बुक ट्रस्ट का ध्यान इस ओर गया और राजीव गांधी विश्वविद्यालय का चयन आयोजन के लिए किया है, यह सराहनीय प्रयास हैं। नवसाक्षरों के लिए पठन-पाठन का माहौल बनेगा।

‘नवसाक्षर लेखन कार्यशाला’ की भूमिका तथा उद्देश्य पर बात करते हुए न्यास के मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक श्री कुमार विक्रम ने कहा कि यह बेहद हर्ष का विषय है कि न्यास अरुणाचल प्रदेश में एक ‘नवसाक्षर लेखन कार्यशाला’ का आयोजन हिंदी विभाग के सहयोग से कर रहा है। हम आपको सिखाने नहीं, आपसे सीखने आए हैं। हम नई चीजें जोड़ पाएँ, यही इस कार्यशाला का उद्देश्य है नवसाक्षर की हमने एक मुहिम चलाई है, जिसके अंतर्गत देश के विभिन्न हिस्सों में इस तरह के आयोजन न्यास करता रहा है। हमारा ध्येय है कि नवसाक्षरों पाठकों को पठनीय सामग्री मिलती रहे ताकि पुनः निरक्षरता में उनका प्रत्यावर्तन न हो जाए। इन कार्यशालाओं में सरल भाषा में कहानियाँ तैयार की जाती हैं, जिसमें पर्यावरण, जेंडर समानता, जीवन कौशल आदि से संबंधित जानकारी भी पिरोई जाती है। उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य की परंपरा में अरूणाचल प्रदेश के हिंदी लेखक नए आयाम जोड़ रहे हैं जिससे हिंदी भाषा-साहित्य और समृद्ध होगी।

राजीव गांधी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. जोराम यालम नबाम कहा कि अरुणाचल प्रदेश के हिंदी विभाग के साथ मिलकर आयोजन करने के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट का आभार व्यक्त करती हूं। हमारे हिंदी रचनाकारों को सीखने का यह सुनहरा अवसर है।

‘नवसाक्षर लेखन कार्यशाला’ के आयोजित किए जाने से लेकर रूपरेखा बनाने तक पर चर्चा करते हुए हिंदी विभाग में वरिष्ठ आचार्य प्रो. ओकेन लेगो ने कहा कि नवसाक्षरों के लिए इस तरह की पहली कार्यशाला के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट ने अरुणाचल प्रदेश के राजीव गांधी विश्वविद्यालय का चयन किया, इसके लिए हम ट्रस्ट के आभारी हैं। अरुणाचल प्रदेश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उनमें निखार लाने की आवश्यकता है। आज यहाँ ये सब इस आयोजन में कुछ सीखकर जाएंगे, पाठकों तक पहुंचेगा, इससे निसंदेश हिंदी साहित्य समृद्ध होगा।

‘नवसाक्षर लेखन कार्यशाला’ के विषय-विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज ने कहा कि न्यास का कार्य बहुत विस्तृत है। न्यास ने नवसाक्षरों के लिए जो प्रयास किए हैं, वह सरहनीय हैं, कई अच्छे पुस्तकें प्रकाशित की हैं, जो विश्व स्तर पर सराही गई हैं। नेशनल बुक ट्रस्ट ने अपने स्थापनकाल से ही प्रतिभाओं को आगे लाने का प्रयास किया है। इसी क्रम में आज राजीव गांधी विश्वविद्यालय के परिसर में नव साक्षरों के लिए यह आयोजन किया जा रहा है, हमें भी आप सबसे कुछ नया सीखने को मिलेगा। गाँव के मुद्दे, विसंगतियाँ जो आपकी दृष्टि में यहाँ दिखाई देती हैं, उनको कहानियों के माध्यम से इंगित करना है। तीन दिन इसी पर हम चर्चा करेंगे।

कार्यशाला में सम्मिलित होने वाले लेखकों के नाम इस प्रकार हैं- प्रो. ओकेन लेगो, प्रो. जोराम यालम नबाम, डॉ. जमुना बीनी, डॉ. तारो सिन्दिक, सुश्री गुम्पी डूसो लोम्बि, डॉ. आइनम इरिंग, श्री दोरजी लोन्पु, सुश्री नोमी मागा गुमरो, डॉ. तुम्बम रीबा, डॉ. मोर्जुम लोई, डॉ. तेली मेचा, सुश्री मिसुङ मदो, श्री वांगो सोसिया, श्री रिंगु एलप्रा तथा सुश्री जुमनू कामदाक उपस्थित रहे।

Author Profile

Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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