*युवा नेतृत्व की जीत: अंकित गौरहा के संघर्ष से खेल मैदान बचा,फन फेयर की अनुमति हुई निरस्त*

बिलासपुर -:-( वायरलेस न्यूज) बेलतरा छात्र हित और खेल संस्कृति को बचाने की दिशा में कांग्रेस नेता अंकित गौरहा का सतत और प्रभावी प्रयास अब निर्णायक परिणाम लेकर सामने आया है। जिस मुद्दे को उन्होंने मजबूती से उठाया, उस पर अब प्रशासनिक मुहर भी लग गई है।

*मैदान का व्यवसायिक व सार्वजनिक आयोजनों में उपयोग*

प्राप्त जानकारी के अनुसार पूरा मामला शासकीय ई. राघवेंद्र राव स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय के खेल मैदान से जुड़ा है,जहां लंबे समय से व्यावसायिक और सार्वजनिक आयोजनों के लिए मैदान का उपयोग किया जा रहा था। इससे छात्रों और खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास और प्रशिक्षण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इस गंभीर विषय को लेकर अंकित गौरहा ने कलेक्टर को विस्तार से पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी और स्पष्ट किया था कि खेल मैदान का मूल उद्देश्य केवल खेल और छात्र विकास होना चाहिए।

*अंकित गौरहा की पहल से बदला प्रशासन का रुख*

कांग्रेस नेता अंकित गौरहा की इस पहल के बाद महाविद्यालय प्रशासन भी सक्रिय हुआ। प्राचार्य ने कलेक्टर को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा और यह साफ किया कि वर्तमान परिस्थितियों में बिना स्पष्ट दिशा-निर्देश के मैदान को किराए पर देना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मैदान का व्यावसायिक उपयोग विवाद और शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न कर रहा है।

*पूर्व अनुमति के बावजूद फन फेयर मेला हुआ निरस्त*

इसी बीच एक बड़े व्यावसायिक आयोजन फन फेयर अम्यूजमेंट पार्क मेला की अनुमति के लिए आवेदन दिया गया था। प्रस्ताव के अनुसार यह मेला 30 अप्रैल 2026 से 8 जून 2026 तक, प्रतिदिन शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित होना था। इसमें झूले, मनोरंजन गतिविधियां और व्यावसायिक स्टॉल लगाए जाने थे। लेकिन प्रशासन ने सभी पहलुओं पर विचार करते हुए, विशेषकर छात्र हित और खेल गतिविधियों को प्राथमिकता देते हुए, इस आयोजन की अनुमति निरस्त कर दी।अनुभागीय अधिकारी,बिलासपुर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि मैदान का उपयोग केवल शैक्षणिक और खेल गतिविधियों के लिए होना चाहिए और किसी भी प्रकार के व्यावसायिक आयोजन की अनुमति देना उचित नहीं है।

*मजबूत नेतृत्व और परिणाम देने की क्षमता*

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि अंकित गौरहा केवल मुद्दे उठाने तक सीमित नहीं हैं,बल्कि उन्हें परिणाम तक पहुंचाने की क्षमता भी रखते हैं। उन्होंने न केवल प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया,बल्कि एक सकारात्मक और छात्र-केंद्रित निर्णय सुनिश्चित कराया।

*खेल मैदान का व्यवसायिक उपयोग छात्रों के साथ अन्याय है*

गौरहा ने बताया खेल मैदान किसी भी समाज के युवाओं का भविष्य गढ़ने का स्थान होता है। इसे मेला या व्यावसायिक आयोजनों के लिए देना छात्रों के साथ अन्याय है। मेरा हमेशा प्रयास रहेगा कि छात्रों को उनका हक और बेहतर सुविधाएं मिलें।इस निर्णय से से निश्चित ही छात्रों और खिलाड़ियों में खुशी का माहौल है। अब उन्हें बिना किसी बाधा के नियमित अभ्यास और प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा,जिससे जिले में खेल प्रतिभाओं को निखारने का मार्ग प्रशस्त होगा।

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Amit Mishra - Editor in Chief
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