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सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता के खिलाफ जारी आरोप पत्र को हाईकोर्ट ने किया निरस्त

On: October 10, 2026 9:09 AM

सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता के खिलाफ जारी आरोप पत्र को हाईकोर्ट ने किया निरस्त

बिलासपुर (वायरलेस न्यूज) छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण में मुख्य अभियंता के पद पर अगस्त रियाजुल बारी 30 जून 2023 को सेवानिवृत्त हुए, सेवानिवृत्ति के बाद अवर सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 21 अप्रैल 2026 को रियाजुल बारी तत्कालीन मुख्य अभियंता सेवानिवृत्ति के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा वर्गीकरण तथा अपील नियम 1966 के अनुसरण में आरोप पत्र जारी किया गया आरोप पत्र में छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण अंतर्गत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में अतिरिक्त निष्पादन सुरक्षा निधि राशि(APS), सुरक्षा निधि की राशि(SD), निष्पादन गारंटी की राशि(PG), रॉयल्टी की राशि 6%, जीएसटी की राशि(GST) का दुरुपयोग एवं अनियमित भुगतान किया गया है शासकीय एवं पदीय दायित्वो का निर्वहन नियमानुसार नहीं कर अनियमित भुगतान किया गया इसलिए यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के विपरीत है, उपरोक्त आरोप पत्र और विभागीय कार्यवाही से व्यथित होकर रियाजुल बारी ने हाई कोर्ट अधिवक्ता शिबाशीष मिश्रा के माध्यम से याचिका प्रस्तुत की याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति बी.डी.गुरु जी के यहां हुई याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक द्वारा यह आधार लिया गया कि याचिकाकर्ता छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में चार दशक से ज्यादा समय तक सेवा देने के बाद यचिकाकर्ता 30 जून 2023 को सेवानिवृत हो गये सेवानिवृत्ति से पहले विभाग द्वारा नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया गया जिसमें यह प्रमाणित किया गया था कि उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच या कोई प्रतिकूल मामला लंबित नहीं है, तथा याचिकाकर्ता के विरुद्ध जारी आरोप पत्र प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की वित्तीय अनियमितता से संबंधित है, वर्तमान में याचिकाकर्ता सेवानिवृत हो चुका है इसलिए उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही केवल नियम 9 छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम 1976 के अनुसार ही की जा सकती है, क्योंकि सेवानिवृत्ति सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही नियम 9(2)(b)(I) के तहत राज्यपाल से मंजूरी लिए बिना शुरू नहीं की जा सकती, इस मामले में उपरोक्त नियमों का पालन नहीं किया गया है इसलिए आरोप पत्र और उसके बाद की विभागीय कार्यवाही अधिकार क्षेत्र से बाहर है, केवल मुख्यमंत्री के मंजूरी के आधार पर कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती, पेंशन नियम मैं स्पष्ट रूप से राज्यपाल की मंजूरी का प्रावधान है सरकार ऐसा कोई संशोधन प्रस्तुत नहीं कर सकी जिससे यह साबित हो कि नियम में राज्यपाल के स्थान पर मुख्यमंत्री कर दिया गया है, याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्दीकी द्वारा यह भी आधार लिया गया कि, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्याय दृष्टांत मीरा साहनी बनाम दिल्ली तथा हाई कोर्ट के रिट अपील नंबर 266/2025 में डिवीजन बेंच के फैसले और रिट याचिका नंबर 3981/2004 मैं पारित आदेश का हवाला दिया गया इनके अनुसार इसमें यह माना गया है कि यदि पेंशन नियम 1976 के नियम 9 की अनिवार्य शर्तों का पालन किए बिना किसी सेवा निवृत सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ विवाह की कार्यवाही शुरू किया जाना सरासर गलत है, कानूनी प्रावधान में किसी बदलाव के बिना कोई कार्यकारी निर्देश पेंशन नियम 1976 के नियम 9 के तहत स्पष्ट रूप से तय अधिकार की जगह नहीं ले सकता इसलिए कानूनी नियम में खास तौर पर बताइए राज्यपाल की मंजूरी लेने की जरूर को सिर्फ सर्कुलर या मुख्यमंत्री की मंजूरी के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता, उपरोक्त आधारों पर माननीय न्यायालय ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध जारी आरोप पत्र दिनांक 21 अप्रैल 2026 और उसके आधार पर शुरू की गई विभागीय कार्यवाही को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत याचिका को स्वीकार कर लिया गया

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Amit Mishra
Amit Mishra
अमित मिश्रा ने वर्ष 1984 से पत्रकारिता को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में अपनाया और तब से लगातार पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी यह यात्रा समाचार, समाज और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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